LDF की हार के बाद कार्यकर्ता ने ये क्या किया, देखकर लोग हो रहे हैरान! आप भी देखिए वीडियो
LDF Worker Shaves Moustache: केरल की राजनीति में दशकों से दो ही गठबंधनों, सत्ताधारी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) और विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) का वर्चस्व रहा है। लेकिन इस बार के स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजों ने न केवल इस सियासी समीकरण को हिलाकर रख दिया है, बल्कि आगामी 2026 विधानसभा चुनावों के लिए खतरे की घंटी भी बजा दी है। इन चुनावों में UDF ने शानदार वापसी करते हुए LDF के कई गढ़ों को ढहा दिया है।
वहीं, बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA ने भी केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर 'त्रिकोणीय' मुकाबले की आहट दे दी है। इस राजनीतिक भूचाल के बीच, पथानामथिट्टा से आई एक खबर ने लेफ्ट कार्यकर्ताओं के दर्द और निराशा को एक प्रतीकात्मक रूप दिया। LDF कार्यकर्ता बाबू वर्गीस ने अपनी पार्टी की हार के बाद भरे मन से अपनी पहचान बन चुकी मूंछें मुंडवा दीं।

यह सिर्फ एक व्यक्ति का वादा निभाना नहीं था, बल्कि यह उस गहरे झटके का 'ड्रामेटिक' इजहार था जो LDF को उसके अपने ही पारंपरिक मजबूत क्षेत्रों में लगा है। उन्होंने अपनी पार्टी की जीत के लिए शर्त लगाई थी लेकिन वो शर्त हार गए। केरल के सियासी नक्शे पर आए इस बड़े बदलाव को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह परिणाम केरल के भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने वाले हैं।
मूंछ मुंडवाने का 'ड्रामेटिक' क्षण
इस चुनावी हार के बीच, पथानामथिट्टा में एक भावुक और नाटकीय पल देखने को मिला। LDF के कार्यकर्ता बाबू वर्गीस ने पार्टी की हार के बाद अपनी पहचान बन चुकी मूंछें मुंडवा दीं। वर्गीस ने चुनाव से पहले सार्वजनिक रूप से यह कसम खाई थी कि अगर LDF पथानामथिट्टा नगरपालिका को बरकरार नहीं रख पाई, तो वह अपनी मूंछें कटवा लेंगे। पार्टी के गढ़ में हार के बाद उन्होंने अपना वादा निभाया, जो लेफ्ट के कार्यकर्ताओं की निराशा को दर्शाता है।
LDF party worker Babu Varghese, who had vowed to shave his moustache if the LDF failed to win the Pathanamthitta Municipality, has now gone through with it after the party’s defeat. #Pathanamthitta #LDF #KeralaLocalBodyElection2025 #KeralaLocalBodyElection pic.twitter.com/gxQ9dKFQSt
— Harish M (@chnmharish) December 13, 2025
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पथानामथिट्टा में LDF का गढ़ टूटा
कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF ने पथानामथिट्टा जिले में LDF को निर्णायक झटका दिया है।
- जिला पंचायत: UDF ने 16 में से 12 सीटें जीतकर जबरदस्त बहुमत हासिल किया। पिछली बार LDF के पास 12 सीटें थीं, जो इस बार घटकर सिर्फ 5 रह गईं।
- अन्य निकाय: UDF ने 34 ग्राम पंचायतों और 7 ब्लॉक पंचायतों पर भी कब्जा किया। नगरपालिका सेगमेंट में भी उसे बड़ी सफलता मिली, जहाँ उसने 3 नगरपालिकाएं जीतीं, जिनमें से 2 पहले LDF के पास थीं।
- नया चेहरा: CPI छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुईं श्रीनादेवी कुंजम्मा की जीत भी खास रही, जिन्होंने UDF उम्मीदवार के तौर पर पल्लीकल डिवीजन से चुनाव जीता।
पूरे केरल में UDF का जलवा
पथानामथिट्टा की स्थिति पूरे केरल के रुझान को दर्शाती है, जहां UDF सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरा है। यह नतीजे 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले LDF के लिए चिंता का विषय हैं।
- नगरपालिकाएं और निगम: UDF ने 87 नगरपालिकाओं में से 54 और 6 नगर निगमों में से 4 पर नियंत्रण हासिल कर लिया।
- ग्रामीण स्तर पर बढ़त: UDF ने ग्राम पंचायतों, ब्लॉक पंचायतों और जिला पंचायतों की सीटों पर भी बड़ी बढ़त हासिल की है।
तिरुवनंतपुरम में BJP की ऐतिहासिक जीत
इस चुनाव में सबसे बड़ा राजनीतिक फेरबदल राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम में देखने को मिला।
- LDF का किला ढहा: पिछले 45 सालों से LDF का जो कब्जा था, उसे तोड़ते हुए बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA ने 101 में से 50 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया। यह संख्या बहुमत से सिर्फ एक कम है, जिससे बीजेपी का पहला मेयर बनने का रास्ता साफ हो गया है।
- मेयर पद की दावेदार: रिटायर्ड DGP आर श्रीलेखा, जिन्होंने सस्थामंगलम वार्ड से जीत हासिल की है, मेयर पद की मजबूत दावेदार मानी जा रही हैं।
काम नहीं आई LDF की लोक-लुभावन घोषणाएं
चुनाव परिणाम यह भी बताते हैं कि LDF की अंतिम क्षणों की कल्याणकारी योजनाएं, जैसे कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाना और आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाना, मतदाताओं को लुभाने में नाकाम रहीं। इन नतीजों ने केरल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है।












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