इंडियन Visa के बाद भी क्यों नहीं मिलती विदेशियों को एंट्री? हिल स्टेशन जहां केवल भारतीयों को है जाने की परमिशन
Chakrata Travel Plan: उत्तराखंड में वैसे तो कई हिल स्टेशन हैं, लेकिन देहरादून जिले का चकराता कुछ अलग ही पहचान रखता है। भीड़-भाड़ से दूर, शांति से भरी वादियों और घने जंगलों के बीच बसा यह हिल स्टेशन एक ऐसा हिडन ट्रेजर है, जो अब भी काफी हद तक पर्यटकों की नजरों से छिपा हुआ है।
समुद्र तल से करीब 2,118 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह इलाका सिर्फ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि अपनी सैन्य अहमियत के लिए भी जाना जाता है। चकराता एक ऐसा हिल स्टेशन है जहां आज भी विदेशी पर्यटकों की एंट्री बैन है। भले ही कोई भारत का वीजा लेकर आया हो लेकिन फिर भी उसे चकराता घुमने का मौका नहीं मिलता।

अगर आप भी एक शांत, सुरम्य और कम भीड़-भाड़ वाली जगह की तलाश में हैं, जहां पहाड़ों की ताजगी और जंगलों की ठंडक एक साथ मिले, तो चकराता आपके लिए परफेक्ट डेस्टिनेशन हो सकता है। आज हम जानेंगे चकराता के लिए ट्रिप पालन करने की हर छोटी-बड़ी डिटेल, साथ ही हम आपको ये भी बताएंगे कि यहां विदेशी लोगों की एंट्री क्यों बैन है।
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विदेशियों के लिए क्यों बंद है चकराता?
चकराता में आज भी सेना की महत्वपूर्ण गतिविधियां होती हैं। यहां सेना की खास टुकड़ियां और खुफिया एजेंसियां मौजूद हैं। सुरक्षा कारणों से विदेशी नागरिकों को यहां जाने की अनुमति नहीं है। विदेशी पर्यटक केवल कालीसी तक जा सकते हैं, जो चकराता से करीब 40 किलोमीटर पहले पड़ता है। वहां तक जाने के लिए भी उन्हें विशेष परमिशन लेनी पड़ती है।
घूमने के लिए कब जाएं चकराता?
अगर आप चकराता घूमने का मन बना रहे हैं तो मार्च से जून और सितंबर से नवंबर के बीच जाना सबसे अच्छा रहता है।
- मार्च से जून: मौसम ठंडा और साफ रहता है। जंगलों में हरियाली होती है और ट्रैकिंग के लिए बढ़िया समय है।
- सितंबर से नवंबर: बरसात के बाद की ताजगी और पहाड़ों की साफ हवा इस मौसम को बेहद खास बना देती है।
- दिसंबर से फरवरी: इस समय यहां बर्फबारी होती है। ठंड अधिक होती है, लेकिन बर्फ देखने वालों के लिए अच्छा समय है।
- जुलाई-अगस्त: भारी बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा रहता है, इसलिए इस समय यहां जाने से बचें।
कम से कम कितने दिन रुकें?
चकराता की खूबसूरती और मुख्य जगहों को अच्छे से देखने के लिए कम से कम 2 से 3 दिन का समय जरूरी है।
2 दिन का ट्रिप
- पहले दिन टाइगर फॉल देखें और चिल्मिरी नेक से सूर्यास्त का नजारा लें।
- दूसरे दिन देवबन की सैर करें और राम ताल गार्डन घूमें।
3 दिन का ट्रिप
- पहले दिन चकराता पहुंचें और टाइगर फॉल का आनंद लें।
- दूसरे दिन बुधेर गुफा और मोइला डांडा ट्रैक करें।
- तीसरे दिन देवबन और चिल्मिरी नेक घूमकर लौटें।
चकराता में घूमने की खास जगहें
- टाइगर फॉल: भारत का सबसे ऊंचा सीधा गिरने वाला झरना
- देवबन: घने देवदार के जंगलों के बीच पहाड़ी नजारों के लिए मशहूर
- बुधेर गुफाएं और मोइला डांडा: प्राचीन गुफाएं और घास के खुले मैदान
- चिल्मिरी नेक: चकराता की सबसे ऊंची जगह
- कनासर: पिकनिक और जंगल की सैर के लिए शानदार
- राम ताल गार्डन: शांत और हरा-भरा बाग
- मुंडाली: सर्दियों में बर्फबारी और स्कीइंग के लिए खास
कैसे पहुंचे चकराता?
चकराता पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट देहरादून में है। देहरादून से चकराता तक टैक्सी या बस के जरिए पहुंचा जा सकता है। रास्ता खूबसूरत है, लेकिन बरसात के मौसम में सावधानी जरूरी होती है। अगर आप भीड़-भाड़ से दूर, पहाड़ों की शांति और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेना चाहते हैं, तो चकराता आपके लिए एक परफेक्ट जगह हो सकती है।
कितना आएगा खर्च?
दिल्ली से चकराता के 3 दिन के ट्रिप की औसतन लागत आपके बजट और ट्रैवल स्टाइल पर निर्भर करती है। नीचे एक मध्यम बजट (standard) वाले ट्रिप का अनुमान दिया गया है:
यात्रा खर्च (दिल्ली से चकराता)
- दिल्ली से देहरादून (बस या ट्रेन): ₹500 - ₹1,000 (एक तरफ)
- देहरादून से चकराता (शेयर टैक्सी या प्राइवेट कैब): ₹300 - ₹1,200 (एक तरफ)
- आने जाने का टोटल खर्च: ₹1,600 - ₹4,400 (दोनों तरफ)
रहने का खर्च (2 रातें)
- बजट होटल / होमस्टे: ₹800 - ₹1,500 प्रति रात
- 2 रात का कुल खर्च: ₹1,600 - ₹3,000
खाने-पीने का खर्च: ₹300 - ₹600 प्रति दिन
3 दिन का कुल खर्च: ₹900 - ₹1,800
स्थानीय घूमने और एक्टिविटी खर्च
- टाइगर फॉल, देवबन, बुधेर गुफा वगैरह तक टैक्सी या लोकल ट्रैवल: ₹1,000 - ₹1,500
ट्रैकिंग और एंट्री फीस ज्यादातर जगहों पर नहीं लगती या बहुत कम होती है।
कुल औसत खर्च (3 दिन/1 व्यक्ति)
- यात्रा (दिल्ली-चकराता) ₹1,600 - ₹4,400
- ठहरना (2 रात) ₹1,600 - ₹3,000
- भोजन ₹900 - ₹1,800
- लोकल घूमना ₹1,000 - ₹1,500
- कुल खर्च ₹5,100 - ₹10,700
सुझाव
- अगर आप ग्रुप में जा रहे हैं तो टैक्सी और होटल का खर्च बंटने से लागत कम हो सकती है।
- प्राइवेट कैब की जगह लोकल शेयर टैक्सी का इस्तेमाल करें तो काफी बचत होगी।
- खाने के लिए लोकल ढाबे सस्ते और स्वादिष्ट होते हैं।
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