सुभाष चंद्र बोस जयंती: 11 बार कैदी, नजरबंदी से भागे, मौत अब भी रहस्य, जानें नेताजी से जुड़ी 10 बातें

सुभाष चंद्र बोस जयंती: 11 बार कैदी, नजरबंदी से भागे, मौत अब भी रहस्य, जानें नेताजी से जुड़ी 10 बातें

नई दिल्ली, 21 जनवरी: भारत के महान देशभक्त नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 23 जनवरी को 125वीं जयंती है। ब्रिटिश भारत के तत्कालीन बंगाल प्रांत के कटक (वर्तमान में ओडिशा में) में 14 बच्चों के परिवार में जन्मे नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक स्वतंत्रता सेनानी बन गए। नेता जी का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था। उन्होंने देश में आजादी की मशाल जलाई थी। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सुभाष चंद्र बोस अग्रणी नेताओं में से एक थे। उन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए जापान के सहयोग से आजाद हिंद फौज का गठन किया था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का दिया हुआ जय हिंद का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है। "तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा" का नारा भी उनका ही दिया हुआ था। आइए जानें नेताजी के बारे में 10 रोचक बातें?

subhash chandra bose

1. नेताजी सुभाष चंद्र बोस 'देशभक्तों के राजकुमार थे'। ये बात भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कही थी। सुभाष चंद्र बोस ने भी महात्मा गांधी को 'देशभक्त' कहा था। भले ही दोनों ने दो अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराएं साझा की हों।

2. नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक आध्यात्मिक देशभक्त थे, उन्हें नेताजी का मानस स्वामी विवेकानंद और श्री रामकृष्ण परमहंस से काफी प्रभावित था। वह 15 सालों के थे जब उन्हें पहली बार स्वामी विवेकानंद के कार्यों का पता चला था।

3. नेताजी सुभाष चंद्र बोस को 1921 से 1941 की अवधि के दौरान 11 बार अंग्रेजों ने कैद किया था। सबसे पहले उन्हें 16 जुलाई 1921 में छह महीने का कारावास हुआ।

4. सुभाष चंद्र बोस जेल में रहते हुए, 1930 में कलकत्ता के मेयर का पद ग्रहण किया था।

5. नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी में आजाद हिंद रेडियो स्टेशन की स्थापना की थी।

6. जय हिंद', 'दिल्ली चलो', 'मुझे खून दो और मैं तुम्हें आजादी दूंगा' जैसे नारों को भी नेताजी ने दी थी।

7. नेताजी ने भारत की आजादी के लिए समर्थन जुटाने के लिए जर्मनी में अपना समय बिताया, तो उन्होंने एमिली शेनकी से शादी की थी जो एक ऑस्ट्रियाई महिला थीं। और प्रसिद्ध जर्मन अर्थशास्त्री अनीता बोस उनकी बेटी थीं।

8. नेताजी 1941 में जब नजरबंद थे तो उन्होंने अपना भेष बदलकर भागने की योजना बनाई थी। उस वक्त उनके साथी सिसिर बोस थे।

9 नेताजी ने 1941 में तत्कालीन इटली विदेश मंत्री गैलियाजो सियानो से मुलाकात की थी, जिन्होंने उनके साथ स्वतंत्रता की घोषणा के मसौदे पर चर्चा की थी। उस दौरान बोस अपनी पत्नी के साथ करीब 6 हफ्ते रोम में रहे थे।

10. नेताजी की मृत्यु रहस्य बनकर रह गई है। कहा जाता है कि 18 अगस्त 1945 को ताइवान में विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई थी। वहीं कई लोगों का भी मानना है कि सुभाष चंद्र बोस एक 'साधु' का वेश बनाकर यूपी में रहते थे। लोग उन्हें गुमनामी बाबा के नाम से जानते थे। जापान में प्रतिवर्ष 18 अगस्त को उनका शहीद दिवस धूमधाम से मनाया जाता है।

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