विशेषज्ञ बोले- ओडिशा सरकार को 500 करोड़ रुपये का होगा नुकसान!
ओडिशा वाणिज्य और परिवहन विभाग ने पुराने वाहन मालिकों के लिए मोटर वाहन कर बकाया और जुर्माने में एकमुश्त छूट/रियायत प्रदान करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट ने हाल ही में इस आशय के विभाग के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि, विशेषज्ञों ने सरकारी खजाने पर इसके गंभीर असर की चेतावनी दी है।
हालांकि यह वाहन मालिकों के लिए राहत की बात हो सकती है, लेकिन इस तरह के फैसले के पीछे की समझदारी पर कुछ सवाल उठ रहे हैं। ये निर्णय क्यों लिया गया और किसके हित साधने के लिए लिया गया? क्या वाहन मालिक स्क्रैपिंग पॉलिसी को लेकर उत्सुक नहीं हैं? या फिर ये वाणिज्य एवं परिवहन विभाग की अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश है?

कैबिनेट के फैसले के अनुसार, यदि वाणिज्यिक वाहन मालिक अपने वाहनों को स्क्रैप और डी-रजिस्टर करना चुनते हैं, तो उन्हें अपने वाहन कर बकाया और जुर्माने की पूरी छूट मिलेगी। हालांकि, कम आयु वाले वाहनों के मालिक जो अपना व्यवसाय जारी रखना चाहते हैं, वे करों पर रियायत का लाभ उठा सकते हैं।
कुछ विशेषज्ञों ने कहा कि कर बकाया और जुर्माने की राशि लगभग 500 करोड़ रुपये हो सकती है, जिसे छूट के फैसले के बाद राज्य के खजाने को नुकसान होगा। इसलिए कई लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि मोटर वाहन कर समय पर क्यों एकत्र नहीं किया जाता है और विभाग के अधिकारी मोटर वाहन कर संग्रह में पीछे क्यों रह गए हैं।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ सुब्रत नंदा ने कहा कि कर बकाया और जुर्माने की कुल राशि 500 करोड़ रुपये से कम नहीं है। कर बकाया माफ करने और जुर्माने में रियायत के मामले में राज्य के खजाने को 500 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। करों और जुर्माने की वसूली में विफलता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 50,000 से अधिक वाणिज्यिक वाहनों के मालिकों ने अपने करों का भुगतान नहीं किया है। कर वसूली नोटिस और विशेष अभियान के बावजूद, 2022 में केवल 4,668 मालिकों से बकाया वसूल किया गया।












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