राज्य की अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार दे रहा है तेलंगाना का वन विभाग

तेलंगाना के जंगलों की उपज में लकड़ी, बांस, सागौन के खंभे, ईंधन की लकड़ी, लकड़ी का कोयला और बीड़ी के पत्ते शामिल हैं, जो विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर प्रदान करते हैं।

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तेलंगाना का वन विभाग ना केवल राज्य को हरित आवरण प्रदान करने में मदद कर रहा है, बल्कि पिछले कुछ सालों में अर्थव्यवस्था को भी बढ़ाने में महत्वपूर्ण फैक्टर बनकर उभरा है। साल 2022-23 में वानिकी और लॉगिंग उप-क्षेत्र में 8,853 करोड़ रुपये जोड़े गए, जो प्राथमिक क्षेत्र द्वारा सकल मूल्य वर्धन का 3.60 प्रतिशत और राज्य में कुल सकल राज्य मूल्य वर्धन का 0.74 प्रतिशत था।

वानिकी और लॉगिंग द्वारा वर्तमान कीमतों पर सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) 2014-15 में 2,465 करोड़ रुपये से बढ़कर 2022-23 में 8,853 करोड़ रुपये हो गया। इस उप-क्षेत्र ने 17.33 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से तीन गुना वृद्धि हासिल की। सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) आम तौर पर उत्पादकता मीट्रिक है जो अर्थव्यवस्था में किसी संगठन या विभाग के योगदान को मापता है।

इसके अलावा कार्बन भंडारण, पोषक तत्वों का चक्रण, जल और वायु शोधन, और वन्य जीवों के आवास का रखरखाव वनों के कुछ प्रमुख पर्यावरणीय लाभ हैं। तेलंगाना के जंगलों की उपज में लकड़ी, बांस, सागौन के खंभे, ईंधन की लकड़ी, लकड़ी का कोयला और बीड़ी के पत्ते शामिल हैं, जो विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसर प्रदान करते हैं। 2019-20 में एक अस्थायी झटके के बावजूद, 2019-20 से 2022-23 के बीच वानिकी और लॉगिंग उप-क्षेत्र में 1.32 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

Telangana's forest department is also giving a boost to the state's economy
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