तेलंगाना सरकार ने रखी मांग, 'परियोजना के मुताबिक हो कृष्णा नदी से पानी का आवंटन'
तेलंगाना सरकार ने जानकारी दी है कि अगर ट्रिब्यूनल तेलंगाना की मांग के अनुसार प्रत्येक परियोजना के लिए पानी का आवंटन निर्धारित करने में विफल रहता है, तो बछावत ट्रिब्यूनल ने राज्य को परियोजना के अनुसार आवंटित पानी का उपयोग करने की अनुमति दे दी है।

साल 2013 में आंध्र प्रदेश की राज्य स्तरीय तकनीकी सलाहकार परिषद ने श्रीशैलम लेफ्ट बैंक नहर (एसएलबीसी) को 30 टीएमसी पानी आवंटित किया और परियोजना की मंजूरी के लिए एक डीपीआर प्रस्तुत किया। कृष्णा ट्रिब्यूनल-2 (जस्टिस ब्रिजेशकुमार) में यह स्पष्ट किया गया है कि उस परियोजना के लिए आवंटित 30 टीएमसी वर्तमान में पलामुरू-रंगा रेड्डी परियोजना के लिए आवंटित किया गया है।
पलामूरू-रंगा रेड्डी परियोजना के लिए तेलंगाना के जल आवंटन को चुनौती देने वाली आंध्र प्रदेश की याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रही। इस दौरान तेलंगाना के वकीलों ने परियोजना के जल आवंटन के समर्थन में अपने तर्क सामने रखे। वकीलों ने तर्क दिया कि कृष्णा जल को जानबूझकर आवंटित नहीं किया गया था और ट्रिब्यूनल से उस पानी को आवंटित करने की पहल करने का अनुरोध किया जो कृष्णा जल से बेसिन के भीतर की परियोजनाओं के लिए किसी भी परियोजना को आवंटित नहीं किया गया था।
तेलंगाना के वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने पलामूरू-रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई योजना के लिए 90 टीएमसी पानी आवंटित करने के तेलंगाना सरकार के जीओ के खिलाफ आंध्र प्रदेश सरकार की तरफ से दायर याचिका पर कड़ी आपत्ति जताई। इस दौरान बताया गया कि तेलंगाना अभी भी लघु सिंचाई के तहत आवंटित 89 टीएमसी में से 45 टीएमसी का भी उपयोग नहीं कर पा रहा है।
गौरतलब है कि तेलंगाना सरकार जल आवंटन के बिना कृष्णा नदी पर परियोजनाएं शुरू करने के लिए आंध्र प्रदेश के खिलाफ लड़ रही है और जल आवंटन में तेलंगाना राज्य को न्याय देने के लिए ट्रिब्यूनल के समक्ष जोरदार तरीके से अपनी बात रखी है।












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