सौम्य रंजन पटनायक के निष्कासन का क्या BJD पर पड़ेगा असर? जानिए
ओडिशा के मुख्यमंत्री व बीजेडी अध्यक्ष सीएम नवीन पटनायक ने अपने दल के दो नेताओं खंडपाड़ा विधायक सौम्य रंजन पटनायक और रेमुना विधायक सुधांशु शेखर परिदा को पार्टी से निष्कासित कर दिया है। बीजेडी ये बड़ा निर्णय ऐसे वक्त में लिया गया है, जब राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में सवाल ये कि क्या इस बार बीजेडी को इसका नुकसान हो सकता है, या फिर नहीं? इस सवाल का जवाब कई बीजद नेता पहले ही दे चुकी हैं। बीजेडी अध्यक्ष का ये निर्णय ऐसे नहीं आया है। दरअसल पार्टी विरोधी नीतियों के चलते बीजद से उन्हें निकाले की मांग जोरों से चल रही थी।
सौम्य रंजन के निष्कासन की वजह
बीजेडी से एमलएल सौम्य रंजन के निष्कासन की बड़ी वजह ये थी उनकी पर पिछले कई दिनों से पार्टी विरोधी औ र सरकार के विपक्ष में बोलने के आरोप लग रहे थे। जिसके बाद बीजेडी के वरिष्ठ नेता शीर्ष नेतृत्व से सौम्य रंजन को निष्कासित करने की मांग कर रहे थे। दरअसल, जब सौम्या अपने संपादकीय और अन्य प्लेटफार्मों पर 5T सचिव की तीखी आलोचना कर रहे थे। पार्टी सूत्रों के मुताबिक एमएलए सौम्य के बयान बीजेडी के खिलाफ अन्य नेताओं को एकजुट होने का मौका दे रहे थे। ऐसे में पार्टी में उनको लेकर नाराजगी बढ़ रही थी।

विपक्ष मान रहा BJD का दोहरा मापदंड
महांगा के दोहरे हत्याकांड में प्रताप जेना की कथित भूमिका, ममिता मेहर मामले में दिब्यशंकर मिश्रा में आरोप, तिर्तोल विधायक बिजय शंकर दास के खिलाफ महिला उत्पीड़न का आरोप हो, या फिर विधायक श्रीकांत साहू के खिलाफ उत्पीड़न के आरोप हों, इन सभी मामलों में विपक्ष के हंगामे के बावजूद बीजेडी ने गंभीरता से नहीं लिया। आरोप है कि इन सभी मामलों में नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। जबकि गोपालपुर विधायक प्रदीप पाणिग्रही, जिनकी कथित रुप से भर्ती घोटाले में भूमिका थी को पार्टी ने निष्कासित कर दिया था और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि सौम्य रंजन पटनायक और सुधांशु शेखर परिदा के मामले में बीजद ने त्वरित कार्रवाई की।
वहीं अब सौम्य रंजन पटनायक और सुधांशु शेखर परिदा के निष्कासन पर राजनीति सक्रिय हो गई है। सौम्या का निष्कासन बीजद भीतर उनको लेकर बढ़ते विरोध को देखते हुए लिया गया है। ये पार्टी की छवि को कायम रखने ओर भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता को लेकर कड़ा संदेश माना जा रहा है।
विधायक सौम्य रंजन और सुधांशु शेखर के निष्कासन को लेकर बीजेडी नेता शिप्रा मल्लिक ने कहा है इसका पार्टी पर कोई असर नहीं होगा। बल्कि अन्य बीजेडी नेताओं के लिए ये एक उदाहरण की तरह है, जिसके जरिए उन्हें अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों से रोका जा सकता है।












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