मध्य प्रदेश को कुपोषण मुक्त बनाएगी शिवराज सरकार, तैयार किया ये प्लान
भोपाल, 19 मार्च: मध्य प्रदेश में कुपोषण एक बड़ी समस्या है. प्रदेश में कुपोषण को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं अब प्रदेश में कुपोषण का स्तर सुधारने के लिए शिवराज सरकार एक और नई पहल करने जा रही है. ताकि बच्चों को कुपोषण से बचाया जा सके.

MP में होगी "स्वस्थ बालक-बालिका स्पर्धा"
शिवराज सरकार मध्य प्रदेश में "स्वस्थ बालक-बालिका स्पर्धा" का आयोजन करने जा रही है. एमपी में बच्चों को कुपोषण से बचाने और पोषण स्तर पर सुधार लाने के लिए इसकी शुरुआत की जा रही है. प्रदेश में 21 से 27 मार्च 2022 तक "स्वस्थ बालक-बालिका स्पर्धा" आयोजित होगी. जिसका उद्देश्य 0 से 6 वर्ष की आयु वर्ग के पोषण स्तर में सुधार लाना और समुदाय का भावनात्मक जुड़ाव पैदा करना है.
इन जगहों पर आयोजित होंगे विशेष कैंप
मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से बताया गया कि जिन आंगनवाड़ी सेवाओं से छूटे 6 साल तक के बच्चों को भी इस आयोजन में शामिल किया जाएगा. ताकि समाज के सभी वर्गों और क्षेत्रों में बच्चों के पोषण के प्रति परिवार एवं समुदाय के लोगों को जागरूक किया जा सके. यह अभियान गांव-गांव में चलाया जाएगा, जहां आंगनबाड़ी केंद्र, पंचायत, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र के अलावा विशेष कैंप का भी आयोजन किया जाएगा. जहां बच्चों की जांच और उन्हें पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराई जाएंगी.
आयोजन का क्या है उद्देश्य
"स्वस्थ बालक-बालिका स्पर्धा" का उद्देश्य लोगों को पोषण के प्रति जागरुक करना है. इस स्पर्धा में 0 से 6 वर्ष तक के आयु वर्ग के बच्चों की ऊंचाई, लंबाई और उम्र का डेटा संकलित करने में मदद मिलेगी. जिससे यह बताया जा सके कि स्वस्थ शरीर के लिए स्वस्थ पोषण सबसे पहली आवश्यकता होती है. इससे प्रदेश एवं सभी जिलों से स्टंटिंग, वेस्टड और कम वजन के बच्चों का चिन्हांकन हो सकेगा. जिन्हें सुपोषित करने की तरफ काम किया जाएगा.
इसके अलावा "स्वस्थ बालक-बालिका स्पर्धा" में बेहतर काम करने पर सरकार की तरफ से पुरुस्कृत भी किया जाएगा. सरकार की तरफ से बताया गया कि श्रेष्ठ उपलब्धि वाले संभाग, जिले, परियोजना, सेक्टर और आंगनबाड़ी केंद्रों को बेहतर काम करने के लिए राज्य स्तर से भी पुरस्कृत किया जायेगा.
बता दें कि मध्य प्रदेश में कुपोषण एक बड़ी परेशानी मानी जाती है. प्रदेश के कई जिलों में कुपोषण की दर बहुत ज्यादा है. ऐसे में कुपोषण की दर को कम कर सुपोषण की दर बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है.












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