Rajasthan: गहलोत सरकार ने ऊंट पालकों को दी बड़ी सौगात,उष्ट्र संरक्षण योजना का किया ऐलान
देश भर में सबसे ज्यादा ऊंट राजस्थान में पाएं जाते है। इसके साथ ही राजस्थान में ऊंटों की सबसे ज्यादा संख्या जैसलमेर में है।

Rajasthan: जैसलमेर के 50 हजार ऊंटों और उसके पालकों की उम्मीदों को पंख लगे हैं। 3 साल पहले बंद हुई योजना फिर से शुरू होने से ऊंट पालन के प्रति पशु पालकों का रुझान बढ़ेगा। राज्य सरकार ने साल 2016 में उष्ट्र विकास योजना शुरू की थी। लेकिन साल 2019 में योजना बंद हो गई। गहलोत सरकार ने बजट में उष्ट्र संरक्षण योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत 3 किश्तों में 10 हजार रुपए की राशि ऊंट पालकों को मिलेगी। इसके लिए ई-मित्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके बाद ऊंटों पालकों में ख़ुशी की लहर छा गई है।
देश में सबसे ज्यादा ऊंट जैसलमेर में
पर्यावरण प्रेमी और उष्ट्र विकास संस्थान के सुमेर सिंह भाटी ने बताया कि देश भर में सबसे ज्यादा ऊंट राजस्थान में पाएं जाते है। इसके साथ ही राजस्थान में ऊंटों की सबसे ज्यादा संख्या जैसलमेर में है। जैसलमेर के देगराय ओरण के सिर्फ 4 गांवों की बात करे तो जैसलमेर के सांवता, रासला, अचला व भोपा गांवों में 5 हजार से ज्यादा ऊंट है। ऐसे में ये योजना बंद होने से सबसे ज्यादा नुकसान जैसलमेर के ऊंट पालकों को हो रहा था। लेकिन अब योजना फिर से शुरू होने पर ऊंट पालकों ने राहत की सांस ली है। जिले में 50 हजार ऊंट है।
उष्ट्र संरक्षण योजना
सुमेर सिंह ने बताया कि पहले ऊंट आवाजाही के लिए उपयोग में लिए जाते थे। लेकिन अब आवाजाही के साधन होने से ऊंटों की उपयोगिता बेहद कम हो गई है। इसके साथ ही सरकार ने भी उष्ट्र विकास योजना बंद कर दी थी। इसके साथ ही पिछले कुछ समय से पर्यटन सीजन पिटने के कारण ऊंट से रेगिस्तान पर सफर व ऊंटनी के दूध से बने प्रोडक्ट भी बनने बंद हो गए है। देश में से जैसलमेर में एकमात्र ऐसा जिला है, जहां ऊंटों की संख्या अधिक है। यहां के रणक्षेत्र में भी ऊंटों की संख्या ज्यादा है। राज्य पशु ऊंटों के संवर्धन व उत्थान के लिए सरकार ने उष्ट्र संरक्षण योजना को दुबारा शुरू करने से ऊंट पालकों को राहत मिलेगी।
क्या है योजना
संयुक्त निदेशक डॉ अशोक सुथार ने बताया कि टोडिया (ऊंट का बच्चा) के जन्म से लेकर 2 महीने का होने पर नजदीकी पशु हॉस्पिटल से वैरिफिकेशन किया जाएगा। इसके बाद ऊंट पालक के खाते में 5 हजार रुपए व टोडिये एक साल का होने पर दूसरा फिजिकल वैरिफिकेशन किया जाएगा। इसके बाद ऊंट पालक के खाते में 5 हजार रुपए आएंगे। इस बीच अगर टोडिये की मौत हो जाती है तो उसे किसी भी प्रकार का कोई फायदा नहीं मिलेगा। इसके साथ ही एक ऊंटनी के दूसरा टोडिया होने पर भी फायदा मिलेगा। लेकिन ऊंटनी के रजिस्ट्रेशन को 15 महीने पूरे होने चाहिए।
ई-मित्र से करना होगा आवेदन
डॉ अशोक सुथार ने बताया कि ऊंट पालकों को टोडियों के जन्म पर ई-मित्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। टोडियों के जन्म से दो महीने की उम्र पूरी होने तक ऑनलाइन आवेदन किया जाना जरूरी है। वर्तमान में 1 नवंबर 2022 या इसके बाद जन्मे टोडियों पर भी योजना के तहत फायदा दिया जाएगा। इस छूट के फायदे के लिए ऊंट पालक को अपना ऑनलाइन आवेदन 28 फरवरी तक अनिवार्य रूप से किया जाना है। जन्म के बाद दूसरी किश्त टोडिये के एक साल पूरे होने पर मिलेगी। लेकिन उससे पहले भी भौतिक सत्यापन होगा। इस दौरान ऊंटनी एवं टोडियों की टैगिंग करवाना अनिवार्य है।












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