पंजाब की महिला मंत्री बलजीत कौर बोलीं- NRI के लिए बुढ़ापा पेंशन जल्द कराएंगे बंद,राज्यवासियों को खुशखबरी देंगे

Punjab latest news in hindi: पंजाब में आम आदमी पार्टी की सत्ता आने के बाद इकलौती महिला मंत्री के तौर पर शपथ लेने वाली बलजीत कौर टेबल पर आई फाइल देखकर ही मजमून भांप लेती हैं। इसी के चलते उन्होंने अपने महकमे में फर्जी पैंशन घोटाले की फाइलों से पर्दा उठाया। इतना ही नहीं, फर्जी पैंशन धारकों के खाते बंद कर प्रति माह सरकारी खजाने के करीब 14 करोड़ रुपए भी बचाए। बलजीत कौर की मानें तो यह धनराशि अभी और बढ़ेगी, क्योंकि अब उनकी नजर उन एन.आर.आईज पर है, जो विदेश में रहते हैं लेकिन आज भी उनके यहां के खातों में पैंशन का लाभ दिया जा रहा है। विभाग इसकी वैरीफिकेशन करवाएगा। उम्मीद है कि इस मुहिम से भी सरकार को कई करोड़ रुपए का लाभ मिलेगा। कुछ ऐसी ही नई मुहिम, विभागीय स्कीम्स, पायलट प्रोजैक्ट्स व विभागीय कामकाज और निजी जिंदगी से जुड़े अनुभवों पर पंजाब की सामाजिक सुरक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने क्या कुछ कहा, जानिए-

Punjabs minister Baljit Kaur talk On old age pension

मामला तब ध्यान में आया, जब पैंशन धारकों के आंकड़े देखे। इन आंकड़ों में पाया गया कि पिछले 5 सालों के दौरान 17 लाख बुजुर्ग बढ़ गए। बुजुर्गों की इतनी संख्या बढ़ जाना बहुत खटका कि अचानक पंजाब में इतने लोग कैसे बुजुर्ग हो रहे हैं? तब आंगनबाड़ी वर्कर्स की सहायता से डोर-टू-डोर सर्वे करवाया और पूरे मामले की गहनता से जांच करवाई, जिससे सच सामने आ गया। इसके बाद फर्जी पैंशन धारकों की पैंशन बंद की गई। इस पहल से पंजाब सरकार को आज करीब 14 करोड़ रुपए प्रति माह की बचत हो रही है।

वजीफा घोटाले के दो पहलू हैं। पहला 2017-20 तक बच्चों की स्कॉलरशिप पैंडिंग पड़ी है। दूसरा, वजीफे का घोटाला, जिसकी विभागीय स्तर पर जांच-पड़ताल मुकम्मल होने की कगार पर थी, लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फैसला किया कि इस मामले की विजीलैंस जांच करवाई जाए। अब यह पूरा मामला विजीलैंस और मुख्यमंत्री भगवंत मान के स्तर पर मॉनीटर किया जा रहा है।

वजीफा घोटाले में कुछ भी रुका हुआ नहीं है। विभागीय इंक्वायरी से लेकर विजीलैंस जांच तक सीधे मुख्यमंत्री की नजर में है इसलिए जनता को यकीन रखना चाहिए कि जल्द ही गुनहगार सलाखों के पीछे होंगे।

पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम का कोई भी पैसा या मामला पैंङ्क्षडग नहीं है। केंद्र सरकार ने 60:40 की रेशो वाली वजीफा स्कीम को 2017 में बंद कर दिया था। केंद्र सरकार की तरफ से फंड रिलीज नहीं होने के बाद से ही कुछ वित्तीय दिक्कतें आई थीं। 2020 के बाद से स्कीम स्थाई तौर पर चल रही है। मौजूदा समय में कोई भी पैसा या यूटेलाइजेशन सर्टीफिकेट पैंङ्क्षडग नहीं है।

मुझे लगता है कि इस संबंध में कुछ बातें मुख्यमंत्री भगवंत मान के स्तर पर साफ हो सकती हैं। जहां तक विभागीय स्तर की बात है तो 2017-20 तक केंद्र सरकार की तरफ से धनराशि नहीं दिए जाने के कारण कई तरह की दिक्कतें आई थीं।

मौजूदा समय में पंजाब के उच्च शिक्षण संस्थानों में किसी विशेष वर्ग के बच्चों की कम होती संख्या जैसा कोई मामला नहीं है। संभव है कि कोविड काल के दौरान संख्या कम हुई हो लेकिन अब बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आज स्थितियां सामान्य हैं।

पंजाब के सामाजिक सुरक्षा विभाग ने झुग्गी-झोपडिय़ों में रहने वाले बच्चों का डाटा इकट्ठा कर परिवारों को जागरूक करने की मुहिम शुरू की हुई है, लेकिन यह अभी भी नाकाफी है क्योंकि इन बच्चों के पारिवारिक हालात बच्चों को काम करने पर मजबूर कर देते हैं। इसलिए ऐसी योजना पर काम किया जा रहा है, जिससे भीख मांगने वाले बच्चे ही नहीं बल्कि देह व्यापार में लिप्त महिलाओं को भी इससे बाहर निकाला जा सके।

जल्द ही इसका पायलट प्रोजैक्ट शुरू किया जाएगा। केंद्र सरकार की वात्सल्य स्कीम भी काफी बेहतर है। पंजाब सरकार सभी अनाथालयों में वीडियो कांफ्रैंसिंग सिस्टम लगाने पर भी काम कर रही है ताकि विभाग के स्तर पर सभी जगह सीधा संपर्क रहे और बच्चों की सभी समस्याओं का समाधान हो।

विभाग के स्तर पर स्वयंसेवी संस्थाओं को फंड दिया जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय के दौरान यह भी सामने आया है कि कुछ स्वयंसेवी संस्थाएं केवल नाम की ही हैं, कोई काम नहीं करती हैं। ऐसे में अब फंड के लिए आवेदन करने वाली स्वयंसेवी संस्थाओं की ग्राऊंड रिपोर्ट मंगवाई जा रही है। इस रिपोर्ट के संतोषजनक होने पर ही फंड रिलीज किए जाएंगे। विभाग के स्तर पर आदेश जारी किए गए हैं कि स्टाफ फील्ड विजिट करे ताकि पूरी जानकारी उपलब्ध हो।

पंजाब सरकार देगी सहारा
विभाग जल्द ही एक एप्लीकेशन लांच करेगा, जिस पर महिलाओं के उत्पीडऩ का तत्काल समाधान होगा। होशियापुर में जल्द ही नए सखी सैंटर की ओपङ्क्षनग के समय यह एप्लीकेशन लांच की जाएगी। विभाग ने जिला स्तर पर बने सखी वन स्टॉप सैंटर को मजबूत बनाने का दायित्व भी संभाला है। मेरी नजर में महिला पीड़ित होती है तो वह घर छोड़कर आ जाती है लेकिन उसे रहने का सहारा नहीं मिलता। सखी सैंटर में भी 3-4 दिन ठहरने की व्यवस्था है लेकिन उसके बाद कोई व्यवस्था नहीं है। विभाग इसी व्यवस्था को दुरुस्त करने पर काम कर रहा है ताकि पंजाब सरकार पीड़ित महिलाओं का सहारा बने। इसके लिए वर्किंग वुमव होस्टल, वृद्ध आश्रम या कोई अन्य स्थायी व्यवस्था तैयार करने पर काम चल रहा है।

...तो तस्वीर बदल सकती है
पेशे से डाक्टर के तौर पर मैंने यह समझा है कि किसी भी काम को किसी भी पद पर रहते हुए अगर जज्बे से किया जाए तो तस्वीर बदल सकती है। सरकारी अस्पताल में आंखों के डाक्टर के तौर पर मैंने इस तस्वीर को बदलते हुए देखा है। मैंने अस्पताल में मरीजों का सस्ता व मुफ्त इलाज किया। जिन आंखों के ऑप्रेशन का 20-25 हजार रुपए प्राइवेट अस्पतालों में वूसला जाता था, उसे मैंने सरकारी अस्पताल में 2-3 हजार रुपए में किया, लेकिन यह बात कुछ लोगों के निजी हितों को भी चोट पहुंचाने लगी तो निजी हित वालों का एक वर्ग मेरे खिलाफ खड़ा हो गया। उन्होंने मुझे धमकियां तक दीं लेकिन मैं अपने रास्ते से विमुख नहीं हुई, जिसका फल भी मिला।

बुजुर्गों को दिया जाएगा पारिवारिक माहौल
गांव में तो आमतौर पर बुजुर्ग एक जगह इकट्ठे हो लेते हैं लेकिन शहर में ऐसा नहीं है। इसलिए शहरी इलाकों में भी 'पिंड दी सत्थ' जैसा प्रोजैक्ट लांच करने की योजना बनाई गई है। फिलहाल यह मुख्यमंत्री के स्तर पर विचाराधीन है। योजना में नए आइडिया भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि महिलाएं भी पुरुष बुजुर्गों के साथ उस जगह पर बैठ सकें। जल्द ही इसका पायलट प्रोजैक्ट लांच किया जाएगा।

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