पंजाब: फर्जीवाड़े की खबर आने पर सरकार ने लगाई 250 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान पर रोक
चंडीगढ़। पंजाब में आयुष्मान भारत योजना में निजी अस्पतालों का फर्जीवाड़ा सामने आने पर मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई वाली सरकार ने अहम निर्णय लिया है। उनकी सरकार ने निजी अस्पतालों के लगभग 250 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही सरकार ने आरोपियेां के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी भी कर ली है।

दरअसल, आयुष्मान योजना केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त खर्चें पर चलती है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 5 लाख रुपये का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाता है। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो को पता चला था कि, बड़ी संख्या में फर्जी दावे मिल रहे हैं। मार्च 2021 में पंजाब विजिलेंस ने इस योजना के तहत करोड़ों रुपये के एक घोटाले का भंडाफोड़ किया था, जिसमें निजी अस्पतालों ने स्मार्ट हेल्थ कार्ड रखने वाले लाभार्थी रोगियों के इलाज के लिए नकली बिल जमा करके दावे हासिल किए थे।

उदाहरण के लिए, एक मरीज, जिसे पित्ताशय के आपरेशन के लिए कपूरथला के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल प्रबंधन ने उससे कहा कि उसका इलाज एक स्मार्ट कार्ड से नहीं किया जा सकता है। उस पर 25,000 रुपये नकद जमा करने के लिए दबाव डाला गया था या उपचार का लाभ उठाने के लिए छह या सात स्मार्ट कार्ड सौंपें। यही सब हुआ तो पंजाब सरकार की ओर से कई अस्पतालों को अपना बनता हिस्सा नहीं दिया गया, जिसके बाद अस्पतालों में मरीजों का इलाज बंद हो गया। बीते दिनों पीजीआइ ने भी मरीजों का इलाज बंद कर दिया, लेकिन अब फिर से मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पंजाब अपने बलबूते पर मरीजों का इलाज करेगा। दिल्ली और बंगाल में सबका इलाज मुफ्त होता है। वहीं, अब राज्य सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत फर्जी बीमा दावे के मामले सामने आने के बाद बड़ा फैसला लिया है। सरकार की ओर से निजी अस्पतालों के लगभग 250 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान पर रोक लगा दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा है कि, पंजाब के 4,812 दावे ऐसे हैं जिनमें किसी न किसी तरह की अनियमिता है और वह फर्जी हैं। राज्य सरकार की ओर से फर्जी दावे पेश करने वाली स्वास्थ्य एजेंसियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस मामले में राज्य सरकार की ओर से विजिलेंस जांच भी करवाई जा सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में, 682 निजी अस्पताल और 245 सरकारी अस्पताल इस योजना के तहत सूचीबद्ध हैं। हालांकि इस योजना को लेकर पिछले कई दिनों से खींचतान चल रही है। पीजीआइ की ओर से योजना के तहत मरीजों का इलाज बंद करने की बात कहीं गई थी, क्योंकि योजना के तहत पैसों का भुगतान नहीं हुआ था।












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