बांझपन के कारणों का पता लगाने के लिए किया जाए अध्ययन, पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने दिए आदेश
विवाहित जोड़ों में बढ़ रही बांझपन की समस्या के प्रति पंजाब के स्वास्थ्य परिवार भलाई मंत्री डा. बलबीर सिंह ने गहरी चिंता प्रकट की। इस दौरान उन्होंने गर्भधारन में असमर्थता के संभावित कारणों का पता लगाने के लिए अध्ययन और सर्वेक्षण करने के आदेश दिए।
स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्रजनन प्रौद्यौगिकी (एआरटी) केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी दिया। दरअसल, स्वास्थ्य मंत्री गुरुवार 28 सितंबर को पंजाब भवन में सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 और सरोगेसी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 संबंधित गठित राज्य स्तरीय बोर्ड की पहली बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मेडीकल कॉलेजों में यह प्रस्तावित एआरटी केंद्र जोड़ों को इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) और सरोगेसी सहित डॉक्टरी प्रक्रियाएं के साथ उनकी बांझपन की समस्या को दूर करन में सहायता करेंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब उन अग्रणी राज्य में से एक है, जिन्होंने पहले ही दोनों एक्ट-एआरटी और सरोगेसी एक्ट लागू किए है।
उन्होंने कहा कि जिससे लिंग चयन और सरोगेटस संबंधित शोषण के मुद्दों के साथ संबंधित अनैतिक अभ्यासों को रोका जा सके। कहा कि इन एक्ट के लागू होने साथ, राज्य के सभी प्रजनन और सरोगेसी कलीनिकों को बांझपन की समस्या के साथ पीड़ित जोड़ों के लिए एआरटी या सरोगेसी प्रक्रियाएं करने के लिए रजिस्ट्रेशन करवाने की जरूरत होगी।
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मंत्री बलबीर सिंह ने कहा कि इन एक्ट को लागू करने का मुख्य उदेश एआरटी कलीनिकों और सरोगेसी में अधिक के व्यापारीकरण को रोकने के इलावा ऐसी अनैतिक प्रथाओ को रोकना है। कहा कि एक्ट की धाराओ का उल्लंघन करने पर सख्त सज़ाएं की भी व्यवस्था है।












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