पंजाब सरकार का सिंचाई घोटाले में एक्शन, दो पूर्व मंत्रियों को लुकआउट नोटिस जारी
चंडीगढ़: पंजाब की भगवंत मान सरकार ने सिंचाई घोटाले की जांच कराने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के आदेश पर अकाली-भाजपा सरकार के समय सिंचाई विभाग में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच का जिम्मा विजिलेंस ब्यूरो को सौंपा गया है। इस मामले में अब तीन रिटायर्ड आईएएस काहन सिंह पन्नू, केबीएस सिद्धू और सर्वेश कौशल से पूछताछ होगी। अकाली नेता जनमेजा सिंह सेखों और शरणजीत सिंह ढिल्लों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।

2017 में सिंचाई विभाग में हुए घोटाले में तीन पूर्व आईएएस अफसरों की भूमिका की जांच की जानी है। विजिलेंस को इस जांच के लिए सरकार से अनुमति की इसलिए जरूरत थी, क्योंकि उक्त तीनों अफसर रिटायर हो चुके हैं और नियमानुसार, आईएएस अफसर की रिटायरमेंट के चार साल बाद तक अगर किसी मामले में उसके खिलाफ कोई कार्रवाई करनी हो तो इसकी अनुमति सरकार से लेना जरूरी है। विजिलेंस ब्यूरो ने इस संबंध में कैप्टन अमरिंदर सिंह और चरणजीत सिंह चन्नी की सरकार के समय भी अनुमति मांगी थी लेकिन दोनों ही मुख्यमंत्रियों ने जांच की अनुमति नहीं दी।
यह घोटाला उस समय सामने आया, जब विजिलेंस विभाग को गिरफ्तार किए गए ठेकेदार गुरिंदर सिंह से पूछताछ के दौरान 17 अगस्त, 2017 को दो पूर्व मंत्रियों, तीन पूर्व आईएएस अफसरों और कुछ इंजीनियरों के नाम बताए। ठेकेदार ने पूछताछ में बताया कि काम दिलाने, बिल पास करने और टेंडर के नियम व शर्तों को उसके मुताबिक बनाने आदि को लेकर उक्त मंत्रियों, अफसरों व इंजीनियरों ने उससे मोटी रकम हासिल की।
ठेकेदार ने विजिलेंस को यह भी बताया था कि तीनों आईएएस अधिकारियों को कुल 21 करोड़ रुपये दिए जबकि दोनों मंत्रियों को 10 करोड़ रुपये दिए थे। इन बयानों के आधार पर विजिलेंस ने उक्त अफसरों और नेताओं से पूछताछ के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और बाद में चरणजीत सिंह चन्नी ने अनुमति मांगी थी। विजिलेंस के सूत्रों के अनुसार ठेकेदार गुरिंदर सिंह को 2007 से 2016 तक 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा के काम अलाट हुए थे। इसे लेकर उसने इन अफसरों, पूर्व मंत्रियों को पैसा दिया। गुरिंदर सिंह के बारे में कहा जाता है कि सिंचाई विभाग में नीचे से लेकर ऊपर तक अफसर भी उसकी पसंद के ही लगते थे। 2006 में 4.75 करोड़ रुपये की उसकी कंपनी मात्र दस वर्ष में 300 करोड़ रुपये की हो गई। इस मामले में गुरिंदर सिंह और विभाग के रिटायर्ड इंजीनियर विजिलेंस विभाग की गिरफ्त में हैं।












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