पराली प्रबंधन वर्कशॉप में शामिल हुए सीएम मान, किसानों से नई तकनीक अपनाने को कहा
पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड द्वारा मोहाली में पराली प्रबंधन के लिए आयोजित वर्कशॉप में पंजाब सीएम भगवंत मान शामिल हुए। वर्कशॉप में CM मान ने कहा कि कोई किसान पराली जलाना नहीं चाहता, लेकिन उसके पास मैकेनिज्म है।

पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड द्वारा मोहाली में पराली प्रबंधन के लिए आयोजित वर्कशॉप में पंजाब सीएम भगवंत मान शामिल हुए। "पराली एक पूंजी" नामक इस वर्कशॉप में CM मान ने कहा कि कोई किसान पराली जलाना नहीं चाहता, लेकिन उसके पास पराली प्रबंधन के लिए न तो मैकेनिज्म है और न ही समय।
मान ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा 15 से 30 अक्टूबर तक धान की फसल को देश के विभिन्न राज्यों में भेजा जाता है। किसानों के पास नवंबर महीने में दूसरी फसल का समय आने के कारण पराली प्रबंधन के लिए केवल 10 दिन का समय होता है। CM भगवंत मान का संबोधन चल ही रहा था कि CM हरियाणा मनोहर लाल खट्टर वहां पहुंच गए। मान द्वारा उनका जिक्र किए जाने की बात कहते हुए CM मनोहर लाल का वेलकम किया गया।
पहले किसान के घर को घेरता है धुआं
CM मान ने कहा कि पराली जलने पर धुएं को दिल्ली व NCR के आसपास पहुंचने में 4-5 दिन लग जाते हैं, जबकि धुआं सबसे पहले किसान के घर के ऊपर पहुंचाता है। लेकिन समाधान नहीं होने के कारण किसान मजबूर है। मान ने इसके समाधान के लिए नवीन तकनीक को अपनाने की जरूरत बताई। साथ ही अब पराली से बायोगैस, खाद के अलावा बिजली का प्रावधान भी बताया।
मान ने जर्मनी की कंपनी वर्बियो के लहरागागा के प्लांट का जिक्र करते हुए कंपनी को एक साल में एक लाख मीट्रिक टन पराली की जरूरत बताई। कहा कि कंपनी 47 हजार एकड़ में पराली नहीं जलने देती। लेकिन समूचे पंजाब में 75 लाख एकड़ में धान की खेती होती है, ऐसी और कंपनियां आ जाएं तो फायदा मिलेगा।
किसानों को फसल का विकल्प देना होगा
CM मान ने कहा कि किसानों को फसल का विकल्प देने की जरूरत है। उन्होंने 93 दिन का समय लेने वाली धान की फसल की किस्म गिनाते हुए उनके समर्थन की बात कही। क्योंकि इससे बिजली-समय तो कम लगता ही है और जमीन से पानी भी कम निकलता है। मान ने पूसा किस्म की फसल में 153 दिन का समय लगने समेत बिजली-पानी व पराली अधिक बनने की बात कही।
पंजाब सरकार द्वारा नरमा-कपास का समर्थन
मान ने कहा कि पंजाब सरकार इस बार नरमा-कपास का समर्थन कर रही है। लेकिन पिछली दो फसल से लोगों का भरोसा टूट चुका है। क्योंकि सफेद मक्खी और गुलाबी सूंडी ने फसल बर्बाद कर दी है। अधिकांश फसल अबोहर-फाजिल्का, तलवंडी साबो, बठिंडा और मुक्तसर में प्रभावित हुई है। मान ने कहा कि गन्ने की खेती धान का एक विकल्प है, एक साल में एक ही फसल है। लेकिन गन्ना बिक्री-खरीद में कमीशन और पर्ची सिस्टम से तालमेल नहीं बैठ पा रहा।
तकनीक में बदलाव और किसान को अपडेट करना जरूरी
मान ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा पहली बार गन्ने की फसल करने वाले किसानों को पूरे देश में सबसे अधिक 380 रुपए प्रति क्विंटल पैसे दिए गए। उन्होंने प्रोसेसिंग की ओर ध्यान देने की बात भी कही। कहा कि पठानकोट से अधिक मीठी लीची, अबोहर-फाजिल्का के किन्नू, जालंधर के आलू-टमाटर, कपूरथला के अदरक, दालें, सूरजमूखी, मक्की और बाजरा समेत पंजाब में ऐसी कोई फसल नहीं है, जिसकी पैदावार न हो सके, लेकिन तकनीक में बदलाव करना पड़ेगा।
मान ने कहा कि फसल बीजने से लेकर स्प्रे और मंडी में ले जाने के तरीके बदल गए हैं। यदि किसान को अपडेट कर दिया जाए तो पॉल्यूशन कम होने समेत इससे फायदा होगा। इसके लिए स्टेक होल्डर और किसानों से बात करने की जरूरत कही।
साल 2022 में पराली जलाने की 49,907 घटनाएं रिकॉर्ड
पंजाब के कैबिनेट एवं पर्यावरण मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर ने साल 2022 में प्रदेश में पराली जलाने के मामलों में 30 प्रतिशत गिरावट रिकॉर्ड होने का दावा किया था। उन्होंने साल 2021 में पराली जलाने की कुल 71,304 घटनाएं रिकॉर्ड होने और साल 2022 में 49,907 घटनाएं रिकॉर्ड होने की बात कही थी। पंजाब सरकार द्वारा अगले 2 वर्ष में पराली जलाने की समस्या के स्थाई समाधान का दावा भी किया गया है।












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