ऋषभ पंत की मदद कर सुर्खियों में आए पानीपत के ड्राइवर-कंडक्टर, अब हरियाणा सरकार करेगी सम्मानित

हरियाणा सरकार क्रिकेटर ऋषभ पंत की मदद करने वाले ड्राइवर और कंडक्टर को सम्मानित करेगी। ऋषभ पंत की कार का शुक्रवार (30 दिसंबर) को एक्सीडेंट हो गया था।

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चंडीगढ़, 1 जनवरीः हरियाणा सरकार क्रिकेटर ऋषभ पंत की मदद करने वाले ड्राइवर और कंडक्टर को सम्मानित करेगी। ऋषभ पंत की कार का शुक्रवार (30 दिसंबर) को एक्सीडेंट हो गया था। पंत को सिर और घुटने में गंभीर चोटें आई हैं। इसके अलावा पीठ और पैर के कुछ हिस्सों में भी चोटें आईं। पंत का एक्सीडेंट रुड़की (Roorkee) के पास मोहम्मदपुर जाट एरिया में हुआ। इस हादसे के बाद एक बस ड्राइवर ने मसीहा बनकर ऋषभ पंत (Rishabh Pant) की जान बचाई। ड्राइवर ने सबसे पहले बस रोककर ऋषभ पंत को कार से दूर किया। इसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया।

ऋषभ पंत अपनी मर्सिडीज कार खुद चलाकर होम टाउन रुड़की जा रहे थे। इसी दौरान उन्हें झपकी आई और उनकी कार डिवाइडर से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। पंत ने खुद बताया कि वह विंड स्क्रीन तोड़कर बाहर आए। इसके बाद कार में भीषण आग लग गई थी। इस एक्सीडेंट के बाद सबसे पहले ड्राइवर सुशील ही ऋषभ पंत के पास पहुंचे थे। क्रिकेटर ऋषभ पंत को एक्सीडेंट के बाद कार से बाहर निकालने वाले हरियाणा रोडवेज के बस ड्राइवर सुशील और कंडक्टर परमजीत पानीपत डिपो में कार्यरत हैं।

ड्राइवर की सूझबूझ से बची ऋषभ पंत की जान

सुशील कुमार ने कहा, ''मैं हरियाणा रोडवेज में ड्राइवर हूं। मैं हरिद्वार से आ रहा था। जैसे ही हम नारसन के पास पहुंचे, 200 मीटर पहले मैंने देखा दिल्ली की तरफ से कार आई और करीब 60-70 की स्पीड में डिवाइडर से टकरा गई। टकराने के बाद कार हरिद्वार वाली लाइन पर आ गई। मैंने देखा कि अब बस भी टकरा जाएगी। हम किसी को बचा ही नहीं सकेंगे क्योंकि मेरे पास 50 मीटर का ही फासला था। मैंने तुरंत सर्विस लाइन से हटाकर गाड़ी फर्स्ट लाइन में डाल दी। वो गाड़ी सेंकड लाइन में निकल गई. मेरी गाड़ी 50-60 की स्पीड में थी। मैंने तुरंत ब्रेक लगाया और खिड़की साइड से कूदकर गया।''

बस ड्राइवर सुशील कुमार ने आगे बताया, ''मैंने उस आदमी (ऋषभ पंत) को देखा। वो जमीन पर पड़ा था। मुझे लगा वो बचेगा ही नहीं। कार में चिंगारियां निकल रही थीं। उसके पास ही वो (पंत) पड़ा था। हमने उसे उठाया और कार से दूर किया। मैंने उससे पूछा- कोई और है कार के अंदर? वो बोला कि मैं अकेला ही था। फिर उसी ने बताया कि मैं ऋषभ पंत हूं। मैं क्रिकेट के बारे में इतना जानता नहीं। उसे साइड में खड़ा किया। उसके शरीर पर कपड़े नहीं थे तो हमने अपनी चादर में उसे लपेट दिया।'

ड्राइवर-कंडक्टर को किया गया सम्मानित

वहीं, पानीपत पहुंचे ड्राइवर और कंडक्टर को पानीपत के जीएम कुलदीप जांगड़ा ने सम्मानित किया। उन्होंने बताया कि ड्राइवर और कंडक्टर ने ऋषभ पंत की जान बचाकर बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। दोनों ने मानवता का परिचय दिया है। उन्होंने बताया कि उनकी प्रदेश के परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा से भी बातचीत हुई है। उन्होंने चालक और परिचालक की डिटेल मंगवाई है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से भी बस के ड्राइवर और कंडक्टर को सम्मानित किया जाएगा।

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