ओडिशा; कोरोना के तीसरी लहर से बचाव की तैयारी, महीने के अंत तक 90% को पहली डोज का लक्ष्य
नई दिल्ली, 17 नवंबर: कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बचाव का सबसे बड़ा हथियार टीकाकरण ही होने वाला है। इसको लेकर ओडिशा सरकार ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। पात्र व्यक्ति यानी 18 वर्ष से अधिक उम्र आयु वर्ग के 90 फीसदी लोगों को 30 नवंबर तक कोविड-19 वैक्सीन की पहली खुराक लगाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के अधिकारियों की ओर से यह जानकारी दी गई है।

ओडिशा के मुख्य सचिव एससी महापात्रा ने स्वास्थ्य विभाग विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में सभी जिला के डीएम से वर्चुअल मीटिंग की और दिसंबर माह के अंत तक शत-प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य हासिल करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि हम अब महामारी के एक ट्रांसिशनल चरण में हैं। मामलों की संख्या में काफी कमी आई है। इस समय, हमें देश में महामारी की संभावित तीसरी लहर से पहले टीकाकरण अभियान को तेज करना होगा।
माइक्रो योजना तैयार करने के निर्देश
मुख्य सचिव ने सभी डीएम को टीकाकरण कार्यक्रम के लए गांव और ग्राम पंचायत स्तर पर माइक्रो योजना तैयार करने को कहा। उन्होंने डोर टू डोर सर्वे के माध्यम से अभियान मोड पर सूक्ष्म योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं। सभी डीएम को आगे अभियान को तेज करने और गांव व ग्राम पंचायत स्तर पर अधिक टीकाकरण केंद्र खोलने के लिए कहा गया है।
प्रदेश में टीकाकरण दर ऊपर
ओडिशा में टीकाकरण दर राष्ट्रीय दर से ऊपर चली गई है। साथ ही, टीके की खुराक की कम बर्बाद हुई है। इस पर सरकार की ओर से और सतर्कता के साथ काम करने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) आरके शर्मा ने कहा कि 13 नवंबर तक ओडिशा में कुल टीकाकरण 4.03 करोड़ को पार कर गया है। राज्य में उपरोक्त 18 वर्ष की आबादी में से लगभग 82.4 फीसदी को पहली खुराक मिली है, जबकि राष्ट्रीय औसत 79.8 फीसदी है।
फुल वैक्सीनेशन में भी बेहतर है राज्य
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि फुल वैक्सिनेशन यानी कोविड-19 के टीके की दोनों डोज लगवाने में भी प्रदेश ने काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि 41.5 फीसदी आबादी को टीके की दूसरी डोज दी जा चुकी है, जबकि राष्ट्रीय औसत 38.4 फीसदी है। राज्य निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) शालिनी पंडित ने कहा कि ओडिशा में टीके की बर्बादी शून्य से 5.3 फीसदी कम हो गई है, जिससे लगभग 20 लाख खुराक की बचत हुई है। उन्होंने कहा कि टीके और सीरिंज की पर्याप्त आपूर्ति है। जिलों को उनकी मांग के अनुसार अधिक आपूर्ति की जाएगी।












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