Odisha के कॉलेजों में सेल्फ फाइनांसिंग कोर्स, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 20 फीसद की सीमा पर मंथन

Odisha का उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश के कॉलेजों में सेल्फ फाइनांसिंग पाठ्यक्रमों पर 20 प्रतिशत की सीमा लगाने पर विचार कर रहा है। उच्च शिक्षा विभाग सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की तर्ज पर सरकारी और गैर-सरकारी दोनों कॉलेजों में ये लागू होगा।

विभाग के अधिकारियों ने कहा, यह कदम अभी प्रस्ताव चरण में है। इसका उद्देश्य लंबे समय तक ऐसे पाठ्यक्रमों के शैक्षणिक और परीक्षा मानकों को बनाए रखना है।

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वर्तमान में 2023-24 शैक्षणिक सत्र के लिए, राज्य में 1,041 डिग्री कॉलेज हैं जिनमें स्व-वित्तपोषित पाठ्यक्रमों के लिए 491 सीटें आवंटित हैं। इसमें 10 सरकारी संचालित डिग्री कॉलेज शामिल हैं जो छात्रों को स्व-वित्तपोषण पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं।

स्व-वित्तपोषित पाठ्यक्रमों के लिए सबसे अधिक सीटें सुंदरगढ़ (62) में हैं, इसके बाद खुर्दा (53) और मयूरभंज (49) हैं। हालांकि, डेटा में निजी स्व-वित्तपोषित कॉलेज शामिल नहीं हैं जो पिछले एक साल के भीतर खोले गए थे।

ऐसे कॉलेज अभी तक विभाग के छात्र शैक्षणिक प्रबंधन प्रणाली (एसएएमएस) के तहत नहीं आए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि पिछले एक साल में चालू शैक्षणिक सत्र के लिए सार्वजनिक विश्वविद्यालयों से संबद्ध करीब 200 स्व-वित्तपोषित कॉलेज खोले गए हैं।

विभाग के एक अधिकारी ने दी न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार गोपनीयता की शर्त पर बताया, क्योंकि ये कॉलेज एसएएमएस के अंतर्गत नहीं हैं, इसलिए हमें नहीं पता होगा कि कितने छात्र इनमें प्रवेश लेते हैं और उनकी गुणवत्ता क्या है।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों ने ऐसे स्व-वित्तपोषित कॉलेजों को अपने केंद्रों में परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दी है, जिसमें कदाचार के कई आरोप हैं। ऐसे कॉलेजों के छात्रों के लिए परीक्षा पास करना सुविधाजनक होता है। इसलिए वे उनमें प्रवेश लेना पसंद करते हैं।

यही कारण है कि पिछले शैक्षणिक सत्र में राज्य में 55,000 डिग्री सीटें खाली हो गई थीं। विभाग के प्रधान सचिव अरविंद अग्रवाल ने कहा कि विभाग का ध्यान वर्तमान में न केवल स्व-वित्तपोषित कॉलेजों, बल्कि नियमित कॉलेजों में भी उच्च शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने पर है।

उन्होंने कहा कि शैक्षणिक और परीक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए सभी पाठ्यक्रमों और सभी कॉलेजों में शिक्षण-अधिगम की कड़ी निगरानी की जाएगी। पिछले साल अप्रैल में, राज्यपाल और विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति प्रोफेसर गणेशी लाल ने कोर्स न शुरू करने को कहा था।

सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को सरकार ने 2022-23 शैक्षणिक वर्ष से कोई भी स्व-वित्तपोषण पाठ्यक्रम शुरू करने से परहेज करने का निर्देश दिया था। अब पूर्व प्रमुख सचिव सास्वत मिश्रा ने विश्वविद्यालयों को छात्रों की कुल संख्या का 20 प्रतिशत तक सीमित करने का निर्देश दिया है।

संस्थाओं को विनियमित करना

  • 1,041 डिग्री कॉलेजों में स्व-वित्तपोषित पाठ्यक्रमों के लिए 491 सीटें आवंटित हैं।
  • पिछले एक वर्ष में लगभग 200 स्व-वित्तपोषित महाविद्यालय खुले।
  • ऐसे कॉलेजों के छात्र के लिए परीक्षा उत्तीर्ण करना सुविधाजनक होता है।
  • सुविधाजनक पाठ्यक्रमों के कारण अभ्यर्थी ऐसे कॉलेजों में एडमिशन लेना पसंद करते हैं।

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