हरियाणा: जहां कभी नहीं जीती भाजपा, वहां इस रणनीति से खिला कमल

हिसार। हरियाणा में भाजपा ने इनेलो और कांग्रेस के गढ़ों को बड़े राजनीतिक परिवारों के रसूख के सहारे ढहाया है। जींद में भाजपा कभी नहीं जीती थी, पहली बार यहां उपचुनाव में ही पार्टी ने जनवरी 2019 में कमल खिलाया। अब आदमपुर में जींद का इतिहास दोहराया है। जींद में पूर्व विधायक हरि चंद मिड्ढा का नाम और काम भाजपा की जीत का आधार बना तो आदमपुर में भजनलाल के नाम पर नैया पार हुई।

 Haryana: Where BJP never won, the fort being demolished there by this strategy, first Jind now won Adampur
भाजपा सरकार के आठ साल के कार्यकाल में चार उपचुनाव हुए, जिनमें पार्टी ने दो जीते और दो हारे हैं। पिछले कार्यकाल में एक और इस सरकार के कार्यकाल में तीन उपचुनाव अब तक हो चुके हैं। आदमपुर में भव्य बिश्नोई की जीत के बाद अब भाजपा व भजनलाल परिवार पर जनता से किए वादे पूरा करने का दबाव भी रहेगा। भव्य पहली बार ही विधानसभा पहुंचे हैं और अब वह हरियाणा के राजनीतिक इतिहास में सबसे कम उम्र 29 साल के युवा विधायक हो गए हैं, इससे पहले यह गौरव डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला को प्राप्त था। वह सबसे कम उम्र 34 साल के विधायक थे।

भव्य को मंत्रिमंडल में शामिल करने के कयास भी लगाए जा रहे हैं, जिनके पूरा होने में कई तरह की अड़चनें हैं। मंत्रिमंडल में कोई जगह फिलहाल खाली नहीं है। मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल में 14 मंत्री पद पूरा भर चुके हैं। 90 विधायकों वाली विधानसभा के लिहाज से इतने ही मंत्री बन सकते हैं। इसे लेकर हाईकोर्ट में केस भी विचाराधीन है।

याचिकाकर्ता की दलील है कि नियमानुसार मुख्यमंत्री सहित कुल 13 मंत्री ही होने चाहिए। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आते समय कुलदीप बिश्नोई की भव्य को विधानसभा उपचुनाव लड़ाने की मांग पार्टी पूरा कर चुकी है। अब कुलदीप को ही राजनीतिक तौर पर एडजस्ट किया जाना है। उनके बेटे को मंत्री बनाने के लिए भाजपा किसी वरिष्ठ मंत्री का पत्ता काटने से गुरेज ही करेगी। चूंकि, क्षेत्र और अन्य समीकरणों को देखते हुए मंत्रिमंडल के सभी पद भरे गए हैं। जजपा कोटे से मुख्यमंत्री के अलावा दो मंत्री हैं। उनके साथ तो वैसे ही कोई छेड़छाड़ संभव नहीं है। हिसार से डॉ. कमल गुप्ता पहले ही कैबिनेट रैंक के मंत्री हैं। ऐसे में भव्य को मंत्रिमंडल में शामिल करना भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के लिए आसान नहीं है।

इस सरकार में पहले बरोदा में छह बार के कांग्रेस विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा की मृत्यु के कारण उपचुनाव हुआ। यहां भाजपा के योगेश्वर दत्त कांग्रेस के इंदुराज नरवाल से हार गए। उसके बाद किसान आंदोलन के बीच इनेलो विधायक अभय चौटाला के इस्तीफा देने पर ऐलनाबाद उपचुनाव की नौबत आई। यहां भाजपा के गोविंद कांडा को अभय चौटाला से पराजय झेलनी पड़ी। दोनों ही सीटें जाट बहुल मानी जाती हैं, इसलिए यहां भाजपा जीत दर्ज नहीं कर पाई।

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