हरियाणा: सीएम खट्टर बोले, देश-प्रदेश को एक परिवार के रूप में लेकर बढ़ें आगे

हरियाणा: सीएम खट्टर बोले, देश-प्रदेश को एक परिवार के रूप में लेकर बढ़ें आगे

Haryana CM Khattar says take the country and the state as a family and move forward

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार प्रदेश के लोगों के बेहतर जीवन निर्माण पर ध्यान दे रही है। इस कड़ी में शिक्षा में नैतिकता और इतिहास की अच्छी बातों को आगे बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के खेल परिसर के मल्टीपर्पज हाॅल में आर्ट आॅफ लिविंग तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के सौजन्य से आयोजित ध्यान एवं मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष व्याख्यान 'हर घर ध्यान' कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि बोल रहे थे। कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक पद्म विभूषण श्रीश्री रविशंकर मुख्यातिथि थे।

मुख्यमंत्री ने कहा, गीता ऐसा ग्रंथ है जो अपने आप में जीवन के मूल्यों का सार है और गीता का संदेश युद्ध के मैदान में दिया गया था जो आज भी पूरी दुनिया के लिए सार्थक है। उन्होंने कहा कि हरियाणा का सौभाग्य है कि गीता का संदेश कुरुक्षेत्र के थानेसर की धरती पर दिया गया। हरियाणा के प्रत्येक जिला व खंड स्तर पर गीता के संदेश व शिक्षा को पहुंचाने के लिए गीता जयंती मनाई जाती है। ध्यान और शांति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अतीत से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है और दुनिया को शांति का संदेश दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि हम 'तेरा है, मेरा है', को छोड़कर देश और प्रदेश को एक परिवार के रूप में देखेंगे तो देश व प्रदेश आगे बढ़ेगा।

1980 के बाद से नहीं हुआ तनाव

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा, कर्म करते जाओ, फल की चिंता मत करो। अपने जीवन में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा 'हमें क्या करना है, हमें क्या बनना है' इन दो वाक्यों के बीच का फासला बहुत कम है।

परंतु करना और बनाना से जीवन के तनाव को खत्म किया जा सकता है। करना और बनना के बीच के अर्थ को समझाते हुए कहा कि जो हमें करना है उसकी चिंता नहीं की जाती और वह तनाव भी नहीं करता लेकिन जो हमें बनना है वो तनाव करता है क्योंकि हम हर पल यही सोचते रहते हैं कि मुझे फलां जैसे कि डॉक्टर, इंजीनियर इत्यादि बनना है, हम उसकी चिंता में तनावग्रस्त हो जाते हैं। इसलिए जब मैं साल 1980 में दिल्ली में आरएसएस में था जो मुझे करना और बनना के बीच का फर्क समझ आ गया है और मैंने सोच लिया कि मैंने देश की सेवा करनी है। उसके बाद मुझे कभी भी तनाव नहीं हुआ क्योंकि मुझे क्या करना है यह पता चल गया था।

वहीं आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक पदम विभूषण श्रीश्री रविशंकर ने तनाव को दूर करने के संबंध में कहा कि आज दुनिया में हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है। इन सबके पीछे तनाव सबसे बड़ा कारण है इसलिए ध्यान करने से तनाव कम होता है और मानसिक स्फूर्ति भी मिलती है।

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