दिल्ली के स्कूलों का दौरा करें गुजरात के सीएम और शिक्षामंत्री: मनीष सिसोदिया
नई दिल्ली, 14 अप्रैल: उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल व शिक्षा मंत्री जीतू भाई वघाणी को दिल्ली सरकार के सरकारी स्कूलों का दौरा करने का न्यौता दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ सरकारी स्कूलों के बच्चों व अध्यापकों से बात करने के लिए आमंत्रित किया है।

सिसोदिया ने कहा है कि दो दिन पहले उन्हें गुजरात के शिक्षा मंत्री वघाणी के विधानसभा क्षेत्र भावनगर स्थित दो सरकारी स्कूलों में जाने का अवसर मिला। इस दौरान वहां सरकारी स्कूलों की हालत खस्ता नजर आई। कई कक्षाओं में बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ रहे थे। पीने के पानी की समस्या से लेकर शौचालय को लेकर भी समस्या बनी हुई थी। शिक्षकों को भी एक-एक महीने के अनुबंध के आधार पर नियुक्त हुआ था, जिनका अनुबंध का हर महीने नवीनीकरण होता है।
उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि हमारा हर स्कूल अच्छा होने के एक न्यूनतम पैमाने पर पास करता हो। स्कूलों में बुनियादी न्यूनतम सुविधाएं हो। बच्चों के लिए पीने का पानी, शौचालय व अन्य सुविधाएं होनी चाहिए। स्कूलों में अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराना सभी राजनीतिक पार्टियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री को आमंत्रित करते हुए दिल्ली के स्कूलों का दौरा करने के लिए कहा है।
गुप्ता ने सिसोदिया के निमंत्रण पर उठाए सवाल
प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष आदेश गुप्ता ने दिल्ली के शिक्षा मॉडल को दिखने के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को दिल्ली आने का न्योता देने के मामले में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली की विश्व स्तरीय शिक्षा व्यवस्था में भारी खामियां हैं। लगभग 700 से अधिक स्कूलों में साइंस की पढ़ाई तक नहीं होती और लगभग 24 हजार शिक्षकों की कमी है। दिल्ली सरकार के 700 से ज्यादा विद्यालयों में प्रधानाध्यापक और 400 से ज्यादा विद्यालयों में उप प्रधानाध्यापक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के 12 कॉलेजों के शिक्षकों एवं कर्मचारियों को कई महीनों से वेतन नहीं मिल रहा है।
देश में होने लगी शिक्षा की राजनीति : आतिशी
आम आदमी पार्टी की नेता और विधायक आतिशी ने कहा है कि यह केजरीवाल मॉडल की सफलता है कि देश में शिक्षा की राजनीति होने लगी है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी और भाजपा की एनसीपीसीआर को मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के भी कुछ स्कूल देखकर आना चाहिए कि किस तरह कबाड़खाने में स्कूल चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सांसद मनोज तिवारी, रमेश बिधूड़ी और प्रवेश वर्मा को दिल्ली का एक भी ऐसा स्कूल नहीं मिला, जहां बच्चों के पास बैठने के लिए बेंच या पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं थे।
दिल्ली सरकार ने सरकारी स्कूलों का कायापलट किया है, जिसकी वजह से सरकारी स्कूलों के बच्चों का दाखिला आईआईटी और जेईईई में हो रहा है। उन्होंने स्कूलों में प्रिंसिपल की कमी के मुद्दे पर कहा कि केंद्र की यूपीएससी, दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल नियुक्त करती है। हम कई बार कह चुके हैं कि हमारे प्रिंसिपल को नियुक्त करें, लेकिन यूपीएससी वो फाइल रोककर बैठी हुई है।












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