UP: आउटसोर्सिंग पर तैनात होने वाले कर्मियों के लिए अच्छी खबर, इस नीति को मंजूरी मिलते ही होंगे खुशहाल
UP News: सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारियों को जल्द ही शोषण और उत्पीड़न से मुक्ति मिलेगी। सरकार ऐसी व्यवस्था बनाने जा रही है जिससे आउटसोर्स कर्मियों के चयन में सेवा प्रदाताओं की मनमानी पर अंकुश लगाया जा सके।
साथ ही, उनके पारिश्रमिक का पूरा भुगतान और कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी राज्य बीमा (ईएसआई) की कटौती नियमित आधार पर सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके लिए श्रम एवं रोजगार विभाग ने नई आउटसोर्सिंग नीति तैयार की है जिसे जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी मिल जाएगी।

प्रस्तावित आउटसोर्सिंग नीति में ग्रुप 'सी' और 'डी' पदों पर चयन के लिए शैक्षणिक योग्यता प्रशासनिक विभाग तय करेगा। चयन में अभ्यर्थियों के उत्पीड़न को रोकने के लिए सेवायोजन पोर्टल पर अधिसूचित रिक्तियों के विरुद्ध आवेदन करने वाले समस्त अभ्यर्थियों में से समूह 'ग' एवं 'घ' एवं समकक्ष श्रेणी के कार्मिकों का चयन निर्धारित शैक्षणिक योग्यता की आधार पर किया जाएगा।
उम्मीदवारों का चयन यादृच्छिक आधार पर नहीं किया जाएगा। अब तक तीन गुना अधिक अभ्यर्थियों का चयन किया जाता था, जिससे सेवा प्रदाता को अपनी इच्छानुसार प्रत्येक तीन अभ्यर्थियों में से एक को चुनने का अधिकार मिल जाता था।
चयन प्रक्रिया में तकनीकी एवं पर्यवेक्षी पदों पर कार्यरत कार्मिकों का चयन प्रशासनिक विभाग द्वारा शैक्षणिक योग्यता, अनुभव एवं साक्षात्कार का वेटेज तय कर किया जायेगा। साक्षात्कार के अंक परीक्षा के कुल अंकों के अधिकतम 20 प्रतिशत तक होंगे तथा साक्षात्कार में संबंधित विभाग के प्रतिनिधि भी अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे ताकि चयन प्रक्रिया में शुचिता एवं पारदर्शिता बनी रहे।
जिन पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता भिन्न-भिन्न है, उन पदों के लिए न्यूनतम आवश्यक शैक्षणिक योग्यता के आधार पर मेरिट बनाई जाएगी। सभी श्रेणियों के चयनित अभ्यर्थियों की 25 प्रतिशत तक प्रतीक्षा सूची तैयार की जाएगी। यह सुनिश्चित करने के लिए कि भर्ती प्रक्रिया समय पर और पारदर्शी तरीके से पूरी हो, संबंधित प्रशासनिक विभाग चयन प्रक्रिया की निगरानी करेगा।












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