इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर एग्रीकल्चर के लिए धामी सरकार केंद्र को भेजेगी प्रस्ताव

उत्तराखंड में जल्द ही इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर एग्रीकल्चर (आईना) खुलेगा। इसके लिए कवायद शुरू हो गई है। यूकॉस्ट की ओर से आयोजित ग्रामीण विज्ञान कांग्रेस में पहुंचे भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) के निदेशक हेल्थ सेफ्टी व एनवायरमेंट ग्रुप डॉ.डीके असवाल ने यह जानकारी दी।
डॉ.असवाल ने कहा कि नियंत्रित रेडिएशन (विकिरण) शरीर के लिए खतरनाक नहीं है। देश में उन्नत खेती में यह वरदान साबित हो रहा है। उत्तराखंड में भी रेडिएशन से कृषि क्षेत्र में क्रांति की जा सकती है। इस रेडिएशन की मदद से बार्क अब तक फल, सब्जियों की 60 से अधिक उन्नत प्रजातियां विकसित कर चुका है। यह प्रजातियां रेडिएशन की मदद से म्यूटेशन (उत्परिवर्तन) करके बनाई गई हैं। देश में सबसे मोटी मूंगफली, उड़द, सरसो आज बार्क की ही देन है। इन प्रजातियों से उत्तराखंड के किसानों की आय में जबरदस्त इजाफा हो सकता है।
रेडिएशन की मदद से यूएन के फूड व एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (एफएओ) ने 3000 से अधिक बीजों की प्रजातियां विकसित की हैं। इससे न केवल उन्नत बीज विकसित किए जा सकते हैं, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी बढ़ाई जा सकती है। उत्तराखंड में यह बीज नई क्रांति ला सकते हैं। अमेरिका में जो भी आम भारत से भेजा जाता है, उसे बार्क पहले रेडिएशन देता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में आईना की स्थापना का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
यह केंद्र प्रदेश के किसी दुर्गम इलाके में बनना चाहिए, ताकि युवाओं को रोजगार मिले और किसानों के लिए खेती की राह मजबूत हो। यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो.दुर्गेश पंत ने कहा कि आईना का प्रस्ताव जल्द ही राज्य सरकार की ओर से भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह का केंद्र खुलने के बाद निश्चित तौर पर रोजगार के साथ ही कृषि क्षेत्र में नई क्रांति आएगी।












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