कोरोना में मां-बाप को खो चुके बच्चों के अभिभावक बने सीएम मनोहर लाल, हरियाणा सरकार ने ली जिम्मेदारी
चंडीगढ़, 31 मई। कोरोना महामारी में माता-पिता को खो चुके बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा से लेकर रोजगार तक की चिंता अब केंद्र और हरियाणा सरकार करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने खुद को ऐसे बच्चों का अभिभावक घोषित करते हुए सेवाएं और लाभ देने की प्रक्रिया तेज कर दी है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद दिल्ली से जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, लाभार्थी बच्चों से जुडे़ और सेवाएं, लाभ जारी किए।

प्रधानमंत्री की मौजूदगी में हरियाणा के विभिन्न जिलों के 93 बच्चों के बचत खाते खोलते हुए उनमें राशि जमा की गई। यह लाभार्थी की आयु 18 वर्ष होने तक 10 लाख रुपये हो जाएगी। आयु 23 वर्ष होने तक बच्चों को राशि का ब्याज मासिक तौर पर मिलेगा। इसके बाद पूरी राशि का इस्तेमाल कर सकेंगे।
पहली से बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को वार्षिक 20 हजार रुपये, तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक लाभार्थियों को 50 हजार रुपये की छात्रवृत्ति देने की प्रक्रिया पूरी की गई। सभी बच्चों को आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपये वार्षिक इलाज का कवर दिया गया।
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय व पॉलिटेक्निक में इन्हें सीधा दाखिला मिलेगा। आईआईटी, आईआईएम की पढ़ाई करने के लिए 2.5 लाख रुपये की छात्रवृत्ति भी दी जाएगी। प्रोफेशनल कोर्स के लिए बिना ब्याज का ऋण मिलेगा।
महिला एवं बाल विकास मंत्री कमलेश ढांडा ने कहा कि भविष्य में इन बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को और गंभीरता से निभाएंगे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 16 जून 2021 को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना शुरू की थी, जिसमें अब तक 93 बच्चे चिह्नित किए हैं।












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