अब नहीं होगा झारखंड से 80 लाख मजदूरों का पलायन, जानें सीएम सोरेन का विशेष प्लान

रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने राज्य के 80 लाख मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए व उन्हें मूलभूत सुविधाएं प्राप्त करवाने के लिए कई प्रकार की खास योजना सामने लेकर आएगी. राज्य सरकार अगले 18 महीनों में झारखण्ड के मजदूरों के लिए 'समग्र प्रवासन नीति' लेकर आएगी. जिससे भविष्य में प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं का निदान करने में सुविधा होगी. वहीं झारखण्ड के प्रवासी श्रमिकों के सुरक्षित प्रवास एवं प्रवासन हेतु 'सेफ एंड रिस्पांसिबल माइग्रेशन इनीशिएटिव' कार्यक्रम भी प्रारंभ किया जाएगा।

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इस संबंध में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि संथाल परगना प्रमंडल से मजदूरों का अधिक पलायन होता है। इन मजदूरों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान उनपर जो बीती, वह पूरा देश जानता है, इसीलिए असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का निबंधन कराने हेतु ई-श्रम पोर्टल आरम्भ किया गया है, जिस पर राज्य के कुल 80 लाख से अधिक श्रमिकों का निबंधन किया जा चुका है।

सीएम सोरेन ने कहा कि इसके तहत निर्माण कार्य करने वाले श्रमिक, घरेलू मजदूर, कृषि श्रमिक, रेहड़ी-पटरी वाले एवं अन्य असंगठित क्षेत्र के मजदूर सम्मिलित हो सकेंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि मजदूरों के पलायन को पूर्णतः समाप्त नहीं किया जा सकता है, लेकिन सरकार इनकी बेहतरी के लिए कुछ करना चाहती है और इसी दृष्टि से झारखण्ड के प्रवासी श्रमिकों के सुरक्षित प्रवास एवं प्रवासन हेतु 'सेफ एंड रिस्पांसिबल माइग्रेशन इनीशिएटिव' कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है. यह कार्यक्रम पायलट-प्रोजेक्ट के तौर पर दुमका, गुमला एवं पश्चिमी सिंहभूम में चलाया जाएगा।

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