'स्किल कॉर्प घोटाले के लिए चंद्रबाबू नायडू जिम्मेदार', आंध प्रदेश के वित्त मंत्री ने लगाया आरोप
बुगना राजेंद्रनाथ ने कहा 'नोट फाईल के आधार पर बिना टेंडर किये ही 3,356 करोड़ रुपये की परियोजना को कैबिनेट बैठक में विशेष मद के रूप में मंजूरी देकर स्वीकृत कर दिया गया।

आंध प्रदेश के वित्त मंत्री बुगना राजेंद्रनाथ ने आंध्र प्रदेश राज्य कौशल विकास निगम (एपीएसएसडीसी) से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले के लिए पिछली टीडीपी सरकार, विशेष रूप से पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू को दोषी ठहराया है। राज्य विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के छठे दिन 'ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट - युवाओं के लिए कौशल विकास - रोजगार' पर एक संक्षिप्त चर्चा के दौरान बुगना ने कहा कि घोटाले की नींव नायडू के सत्ता में आने के दो-तीन महीने बाद रखी गई थी।
बुगना राजेंद्रनाथ ने कहा, 'नोट फाईल के आधार पर बिना टेंडर किये ही 3,356 करोड़ रुपये की परियोजना को कैबिनेट बैठक में विशेष मद के रूप में मंजूरी देकर स्वीकृत कर दिया गया। परियोजना को हरी झंडी देने से पहले न तो परियोजना की डीपीआर थी और न ही कोई प्रमाणीकरण।' इसके साथ ही बुगना ने विस्तार से सदन को बताया कि घोटाले में क्या हुआ और घोटाले के दो मुख्य अभियुक्तों की तत्कालीन मुख्यमंत्री नायडू के साथ बैठक से इसकी शुरुआत कैसे हुई।
फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए वित्त मंत्री बुगना ने आगे कहा, 'इस बात पर सहमति बनी कि कंपनी परियोजना लागत का 90% वहन करेगी, जबकि शेष 10% लागत सरकार वहन करेगी। सुमन बोस और सौम्याद्री शेखर बोस के हस्ताक्षर अलग-अलग हैं, हालांकि दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं, जो सीमेंस कंपनी के लिए काम करने वाले थे।'
उन्होंने बताया, 'बाद में जीएसटी अधिकारियों और सीआईडी की जांच में यह बात सामने आई कि कंपनी और राज्य सरकार की ओर से सुमन बोस के बीच हुए समझौते की जानकारी सीमेंस वैश्विक कंपनी को नहीं थी। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की गहन जांच से और भी चौंकाने वाले घटनाक्रम सामने आए हैं। कई शेल कंपनियों को सरकार द्वारा जारी धन का अनाधिकृत हस्तांतरण किया गया था, हालांकि APSSDC और सरकार के बीच समझौते के अनुसार एक भी काम नहीं हुआ था।'












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