Child marriages in India: दक्षिण भारतीय राज्यों के आंध्र प्रदेश राज्य में सबसे अधिक हो रहा बाल विवाह, स्टडी
Child marriages in India: सदियों से प्रचलित बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए हजारों प्रयास किए जा चुके हैं लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में नाबालिग लड़कियों का बाल विवाह करवाया जा रहा है। इतना ही नहीं दक्षिण भारत में 18 साल से कम उम्र में शादी करने वाली लड़कियों की संख्या सर्वाधिक आंध्र प्रदेश में हैं। इस बात का खुलासा लैंसेट में पब्लिश एक स्टडी में हुआ है।

द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि आंध्र प्रदेश में चार में से एक से अधिक महिलाओं की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले हो जाती है।द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन से पता चला है कि दक्षिण भारतीय राज्यों में बाल विवाह के मामले में आंध्र प्रदेश शीर्ष पर है।
इस स्टडी में ये बात सामने आई है कि आंध्र प्रदेश में चार में से एक से अधिक महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हो गई। वहीं उसके पड़ोसी राज्य तेलंगाना की बात की जाए तो यहां पर पांच में से एक से अधिक लड़कियों की शादी 18 वर्ष की विवाह योग्य आयु से हो जाती है।
द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में आंध्र प्रदेश में लड़कियों के बाल विवाह का प्रचलन 29.6 प्रतिशत दर्ज किया गया, वहीं दूसरे नंबर पर तेलंगाना 23.4 प्रतिशत, कर्नाटक 20.5 प्रतिशत तीसरे नंबर पर तमिलनाडु 12.7 प्रतिशत, और केरल 6.2 प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर है।
वहीं बाल विवाह के मामले में देश भर की बात की जाए तो पश्चिम बंगाल इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। रिपोर्ट के अनुसार यहां
41.4 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो जाती है। राजस्थान में यह दर 21.3 प्रतिशत थी।
दक्षिण भारतीय राज्यों में हो रहे बाल विवाह पर की गई स्टडी के अनुसार
आंध्र प्रदेश में 14.6 प्रतिशत
तेलंगाना में 13.5 प्रतिशत
तमिलनाडु में 4.8 प्रतिशत
कर्नाटक में 4 प्रतिशत
केरल में 0.8 प्रतिशत लड़कों की शादी 21 वर्ष की निर्धारित आयु से पहले हो गई।
बिहार में 21 साल की उम्र से पहले लड़कों की शादी (26.6 प्रतिशत) होने की संख्या सबसे अधिक है, इसके बाद राजस्थान (26.4 प्रतिशत) का स्थान है।
स्टडी में बताया गया है कि भारत में पांच में से एक लड़की और छह में से एक लड़का क्रमशः 18 और 21 वर्ष की कानूनी रूप से स्वीकृत उम्र से पहले शादी के बंधन में बंध जाती हैं। यह बाल विवाह के संकट को खत्म करने की दिशा में हुई प्रगति में ठहराव को दर्शाता है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि 2016 और 2021 के बीच, कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में बाल विवाह की प्रथा अधिक आम हो गई है।












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