Shardiya Navratri Day 4: भक्ति-भाव से करें मां कूष्मांडा की पूजा, गाएं ये आरती, मैया होगी प्रसन्न
Shardiya Navratri Day 4 Aarti: नवरात्रि का चौथा दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा को समर्पित होता है। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मांड की सृष्टि की शुरुआत मां कूष्मांडा की दिव्य मुस्कान से हुई थी। इसलिए उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है। मां कूष्मांडा अष्टभुजा देवी हैं, जिनके आठ हाथों में अमृत कलश, चक्र, गदा, धनुष-बाण, कमल, माला और कमंडल सुशोभित रहते हैं। वह बाघ पर सवार होकर अपने भक्तों को बल, बुद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद देती हैं।
नवरात्रि के इस दिन विशेष रूप से मां कूष्मांडा की आरती गाने का महत्व है। भक्तजन सुबह और सायंकाल मां की आरती कर उनकी कृपा पाने का प्रयास करते हैं। यह विश्वास है कि श्रद्धा भाव से की गई आरती जीवन से अंधकार और संकटों को दूर कर सुख-समृद्धि और शांति का मार्ग खोलती है।

मां कूष्मांडा की आरती गाने से न केवल वातावरण पवित्र होता है बल्कि मन को अद्भुत शांति और ऊर्जा भी प्राप्त होती है। नवरात्रि के चौथे दिन भक्त घरों और मंदिरों में मां का पूजन करते हैं, भोग अर्पित करते हैं और पारंपरिक भजन व आरती गाकर देवी को प्रसन्न करते हैं।
🌺कैसे करें मां कुष्मांडा की पूजा?
🔱मां कूष्माण्डा की पूजा विधि
- सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और संकल्प लें।
- लकड़ी के पाटे पर लाल कपड़ा बिछाकर मां कूष्माण्डा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- पास में जल से भरा कलश रखें, उस पर स्वस्तिक बनाकर आम्रपल्लव और नारियल रखें।
- मां को रोली, अक्षत, पुष्प, सिंदूर, सुपारी, पान, लौंग और इलायची अर्पित करें।
- धूप और दीप जलाकर मां का ध्यान करें।
- "ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः" मंत्र का 108 बार जप करें।
- मां को मालपुए, हलवा और कद्दू से बने पकवानों का भोग लगाएं।
- अंत में मां की आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
🪔आरती देवी कुष्मांडा माता की
- कूष्माण्डा जय जग सुखदानी।मुझ पर दया करो महारानी॥
- पिङ्गला ज्वालामुखी निराली।शाकम्बरी माँ भोली भाली॥
- लाखों नाम निराले तेरे।भक्त कई मतवाले तेरे॥
- भीमा पर्वत पर है डेरा।स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
- सबकी सुनती हो जगदम्बे।सुख पहुँचती हो माँ अम्बे॥
- तेरे दर्शन का मैं प्यासा।पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
- माँ के मन में ममता भारी।क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
- तेरे दर पर किया है डेरा।दूर करो माँ संकट मेरा॥
- मेरे कारज पूरे कर दो।मेरे तुम भंडारे भर दो॥
- तेरा दास तुझे ही ध्याए।भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
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डिस्क्लेमर: हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और इंटरनेट पर उपलब्ध स्रोतों के आधार पर प्रस्तुत की गई है। किसी भी प्रकार का निर्णय लेने या कदम उठाने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या पुरोहित से परामर्श अवश्य करें।












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