Shardiya Navratri 2025 : पीरियड्स में कैसे करें नवरात्रि की पूजा? मासिक धर्म के कारण पूजा हो जाती है खंडित?
Shardiya Navratri 2025 Puja During Period: शारदीय नवरात्रि 2025 की शुरुआत आज से हो गई है, इसका समापन 2 अक्टूबर को 'विजयादशमी' के साथ होगा, इस बार की नवरात्रि पूरे 10 दिनों की है, इस नवरात्रि में मां गज की सवारी के साथ धरती पर आई हैं, जो कि सुख-शांति और समृद्दि का मानक है।
नवरात्रि में सभी भक्त मां के 9 रूपों की पूजा करते हैं तो वहीं नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना, व्रत और अनुष्ठान किए जाते हैं। भक्तगण 9 दिनों का उपवास भी रखते हैं, मां की पूजा में पूरी शुद्दता बरतनी चाहिए, तभी जाकर मां की पूजा पूरी होती है लेकिन अगर नवरात्रि के दौरान किसी को मासिक धर्म हो जाए तो फिर उसकी पूजा कैसे पूरी होगी?

कहते हैं कि ऐसा होने पर पूजा खंडित हो जाती है लेकिन ये तो प्राकृतिक है इसे रोका नहीं जा सकता है तो महिलाओं के मन में अक्सर यह सवाल उठता है, ऐसी स्थिति में फिर क्या करना चाहिए?
मासिक धर्म को अशुद्धि की अवस्था माना गया है (Shardiya Navratri 2025 Puja During Period)
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, मासिक धर्म को अशुद्धि की अवस्था माना गया है इसी कारण कई परिवारों में महिलाओं को इस दौरान मंदिर, पूजा स्थान या धार्मिक अनुष्ठानों से दूर रहने की सलाह दी जाती है हालांकि वक्त के साथ लोगों की सोच में बदलाव देखा गया है,अब काफी लोग ये मानने लगे हैं कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक और पवित्र प्रक्रिया है, इसे अशुद्धि मानना केवल सामाजिक परंपरा है, न कि धार्मिक सत्य इसी कारण आजकल कई लोग यह मानते हैं कि महिलाएं इस अवस्था में भी मानसिक रूप से पूजा कर सकती हैं, इसमें कोई भी बुराई नहीं है।
क्या कर सकती हैं महिलाएं (Shardiya Navratri 2025)
अगर नवरात्रि के दौरान पीरियड आ जाएं तो ऐसे में महिलाएं मानसिक रूप से मां दुर्गा का ध्यान करें। वो घर के मंदिर या पूजन स्थल पर जाकर दूर से प्रणाम कर सकती हैं। अपने मन में वो दुर्गा चालीसा, स्तुति या मंत्र का मौन जाप कर सकती हैं। इस दौरान वो पूरी तरह से तैयार होकर पूजा करें, ऐसा करने में कोई दिक्कत नहीं है। आप पीरियड्स के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ मोबाइन पर देखकर कर सकती हैं। इसके अलावा आप घर के किसी अन्य सदस्य से पाठ सुन सकती है।
किन बातों से बचें ( Shardiya Navratri 2025 )
अगर परिवार में बड़े आपको पूजा स्थल में जाने से रोकें तो आप बहस ना करें क्योंकि पूजा में क्रोध और तनाव भी वर्जित है। आप शांत मन से मां की पूजा मन से करें। घटस्थापना, हवन, दुर्गा सप्तशती पाठ या अखंड ज्योति से दूर रहें। शारीरिक अस्वस्थता में व्रत को मजबूरी में न करें, जो भी करें उसे शांति, मन और लगन से करें तभी आपकी पूजा सफल होगी।
Disclaimer: इस आलेख का मतलब किसी भी तरह का अंधविश्वास पैदा करना नहीं है। यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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