शरद पूर्णिमा 2017: जानिए मुहूर्त और पूजा विधि और इसका महत्व
नई दिल्ली। 5 अक्टूबर को Sharad Purnima है, जिसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं, कहा जाता है कि इस दिन रात में आकाश से अमृत की वर्षा होती है और इसी वजह से बहुत जगह लोग रात में खीर बनाकर अपने घर के आंगन में रखते हैं, ताकि रात भर खीर में अमृत बरसे और वो सुबह उठकर उसका ग्रहण करें। कहा जाता है कि साल में केवल इसी दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है, शरद पूर्णिमा को ही चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है।

क्या है कथा?
एक साहुकार के दो पुत्रियां थी। दोनो पुत्रियां पुर्णिमा का व्रत रखती थी। परन्तु बडी पुत्री पूरा व्रत करती थी और छोटी पुत्री अधुरा व्रत करती थी। परिणाम यह हुआ कि छोटी पुत्री की सन्तान पैदा ही मर जाती थी।

सन्तान पैदा होते ही मर जाती है
उसने पंडितो से इसका कारण पूछा तो उन्होने बताया की तुम पूर्णिमा का अधूरा व्रत करती थी जिसके कारण तुम्हारी सन्तान पैदा होते ही मर जाती है। पूर्णिमा का पुरा विधिपुर्वक करने से तुम्हारी सन्तान जीवित रह सकती है।

बडी बहन को बुलाकर लाई
उसने पंडितों की सलाह पर पूर्णिमा का पूरा व्रत विधिपूर्वक किया। उसके लडका हुआ परन्तु शीघ्र ही मर गया। उसने लडके को पीढ़े पर लिटाकर ऊपर से पकडा ढक दिया। फिर बडी बहन को बुलाकर लाई और बैठने के लिए वही पीढ़ा दे दिया। बडी बहन जब पीढ़े पर बैठने लगी जो उसका घाघरा बच्चे का छू गया। बच्चा घाघरा छुते ही रोने लगा।

पूरा व्रत करने का ढिंढोरा
बड़ी बहन बोली कि तु मुझे कंलक लगाना चाहती थी। मेरे बैठने से यह मर जाता। तब छोटी बहन बोली कि यह तो पहले से मरा हुआ था। तेरे ही भाग्य से यह जीवित हो गया है। तेरे पुण्य से ही यह जीवित हुआ है। उसके बाद नगर में उसने पुर्णिमा का पूरा व्रत करने का ढिंढोरा पिटवा दिया।

क्या है पूजा विधि
- इस दिन मनुष्य विधिपूर्वक स्नान करके उपवास रखे ।
- मां लक्ष्मी की पूजा करें, घी के दीपक जलाए।
- इसके बाद घी मिश्रित खीर तैयार करे और बहुत-से पात्रों में डालकर उसे चन्द्रमा की चांदनी में रखें।
- जब एक प्रहर (३ घंटे) बीत जाएं, तब लक्ष्मीजी को सारी खीर अर्पण करें।
- फिर उस खीर को प्रसाद स्वरूप वितरित करके सेवन करें, मां लक्ष्मी की कृपा अवश्य प्राप्त होगी

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