Shanishchari Amavasya: पितरों की शांति और पितृदोष निवारण के लिए करें विशेष उपाय
Shanishchari Amavasya: संवत 2080 आश्विन मास की अमावस्या सर्वपितृ अमावस्या कहलाती है। यह अमावस्या 14 अक्टूबर 2023 शनिवार को आ रही है। श्राद्ध पक्ष की समाप्ति सर्वपितृ अमावस्या पर होती है और इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु तिथि उनके परिवार वालों को ज्ञात नहीं होती है। इस दिन ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों की संतुष्टि और प्रसन्नता के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, दान आदि कर्म किए जाते हैं।

इस दिन कुछ विशेष उपाय करके पितृदोष के निवारण की पूजा भी की जाती है। इस दिन शनिवार होने के कारण शनैश्चरी अमावस्या का संयोग भी बना है। इस दिन पितरों के निमित्त किए गए कर्मों से उनकी संतुष्टि होती है और वे परिवार वालों को अच्छे आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
सर्वपितृ अमावस्या के दिन क्या करें क्या न करें-
- सर्वपितृ अमावस्या के दिन अपने ज्ञात-अज्ञात पितरों की संतुष्टि और शांति के निमित्त किसी पवित्र नदी के तट पर नदी न हो तो घर पर ही किसी विद्वान आचार्य के माध्यम से अपने पितरों का श्राद्ध कर्म करवाएं।
- अपनी सामर्थ्यके अनुसार ब्राह्मणों को भोजन करवाएं। गौ, काग, श्वान और चींटियों के निमित्त भी अन्न निकालें।
- श्राद्ध कुतप काल अर्थात् दिन में 11 बजकर 36 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट के बीच के समय में ही करें।
- श्राद्ध में पलाश तथा महुआ के वृक्षों के पत्तों के दोने अथवा हाथ से बनाए मिट्टी के पात्र का ही प्रयोग किया जाना चाहिए। अथवा चांदी के बर्तनों का उपयोग किया जा सकता है।
- पितरों की पूजा में सफेद सुगंधित पुष्पों का ही प्रयोग किया जाना चाहिए।
- गया, पुष्कर, प्रयाग, कुशावर्त हरिद्वार आदि तीर्थों में श्राद्ध की विशेष महिमा है। सामान्यत: घर में, गोशाला में, देवालय में भी श्राद्ध किया करन प्रशस्त कहा गया है।
- श्राद्ध में गौ के दूध, दही, घृत काम में लेने चाहिए।
क्यों करें सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध
- परिवार वालों को वैसे तो अपने अपने पितरों की मृत्यु तिथि पता होती है और वे उस तिथि पर श्राद्ध करते भी है किंतु कई ऐसे पितर भी होते हैं जिनकी मृत्यु तिथि हमें पता नहीं होती या ऐसे पिछली कई पीढ़ियों में पितर होते हैं जिनके बारे में हमें पता ही नहीं होता है, ऐसे समस्त पितरों की संतुष्टि और शांति के लिए सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध अवश्य करना चाहिए।
- ऐसे अज्ञात पितरों के कारण भी कई बार पितृ दोष लग जाता है और उस कारण परिवार के लोग परेशान होते रहते हैं। ऐसे दोष की निवृत्ति के लिए सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करना चाहिए।
क्या करें
- इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों एक, तीन, पांच, नौ, 11 ब्राह्मणों को भोजन करवाया जा सकता है।
- गरीबों, नि:शक्तों को भोजन करवाने से भी बड़ा पुण्य मिलता है।
- इस दिन पितरों के निमित्त गौ शाला में सेवा करें। गायों के लिए चारा भेंट करें।
- पितरों के नाम से प्लाऊ लगवाएं।












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