Shani Pradosh vrat 2020 : 2 घंटे 21 मिनट के लिए बनेगा शनि-पुष्य का योग

नई दिल्ली। नक्षत्रों का राजा कहा जाने वाला पुष्य नक्षत्र 6 और 7 मार्च को रहेगा, लेकिन इसके साथ शनिवार का संयोग जुड़ जाने के कारण शनि-पुष्य का दुर्लभ और शुभफलदायक संयोग केवल 7 मार्च 2020 शनिवार को बन रहा है। उज्जैनी पंचांगों के अनुसार शनिवार को पुष्य नक्षत्र प्रातः 9 बजकर 4 मिनट तक ही रहेगा। यानी आपको शनि से जुड़े उपाय करने के लिए या शनि-पुष्य के दुर्लभ संयोग का लाभ उठाने के लिए केवल दो घंटे और 21 मिनट का समय ही मिलेगा।

पुष्य नक्षत्र प्रत्येक 27 दिन में आता है...

पुष्य नक्षत्र प्रत्येक 27 दिन में आता है...

पुष्य नक्षत्र वैसे तो प्रत्येक 27 दिन में आता है, लेकिन इसके साथ कुछ विशेष दिनों का संयोग इसे बहुत खास बना देता है। शनिवार, गुरुवार और रविवार को पुष्य नक्षत्र का आना अत्यंत शुभ माना जाता है। इन दिनों में खरीदारी करना शुभ होता है क्योंकि इससे स्थायित्व रहता है। अनेक लोग केवल इन खास दिनों का ही इंतजार करते हैं। पुष्य नक्षत्र का देवता बृहस्पति और स्वामी शनि है। इसलिए शनि और गुरु पुष्य का सर्वाधिक महत्व बताया गया है। जिस जातक का जन्म शनि पुष्य नक्षत्र में होता है वे धर्म के अनुसार आचरण करने वाले, बुद्धिमान, दूरदर्शी, विचारशील, सद्गुणों से युक्त, शांत, धैर्यवान, अंतर्मुखी और प्रकृति प्रेमी होते हैं। इनकी आयु के 35 से लेकर 42वें वर्ष तक का समय बहुत महत्वपूर्ण और भाग्योदयकारी होता है।

क्या करें शनि पुष्य के दिन

क्या करें शनि पुष्य के दिन

  • शनि पुष्य संयोग एक विशेष दिन होता है, जब शनि की पीड़ा से मुक्ति पाकर जीवन को सुख-सौभाग्य से परिपूर्ण किया जा सकता है। पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि है, इसलिए इस दिन शनि से जुड़े उपाय करने से शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
  • जन्मकुंडली में यदि शनि पीड़ा दे रहा है तो शनि पुष्य के दिन शनिदेव का अभिषेक सरसो के तेल से करें। नीले पुष्पों से शनिदेव का श्रृंगार करें। इससे पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
  • शनि पुष्य के दिन काले कुत्ते को एक ताजी रोटी पर सरसो का तेल लगाकर खिलाएं। इससे साढ़ेसाती के दुष्प्रभाव कम होते हैं।
  • इस दिन भिखारियों, कोढ़ी, गरीबों, जरूरतमंदों को चप्पल, छाता, कंबल दान करें।
  • यदि शनि के कारण आपके धन-संपत्ति अर्जित करने में दिक्कत आ रही है। पैसों की बचत नहीं हो रही है। जीवन में तरक्की नहीं हो रही है तो बहते पानी 11 पानी वाले नारियल प्रवाहित करें।
भगवान शिव का अभिषेक करें

भगवान शिव का अभिषेक करें

  • ऊं शं शनैश्चराय नमः मंत्र की 11 माला लाल चंदन की माला से जाप करें। रोगों से मुक्ति होगी। अष्टम शनि की शांति होगी।
  • इस दुर्लभ संयोग में काले घोड़े की नाल या नाव की कील से बनी अंगूठी धारण करने से शनि की पीड़ा शांत होती है।
  • इस दिन काले घोड़े को सवा किलो काले भीगे हुए चने खिलाने से आर्थिक संकट दूर होता है।
  • शनि-पुष्य के दिन देसी घी का हलवा बनाकर हनुमानजी को भोग लगाएं। समस्त सुखों की प्राप्ति होती है।
  • आजीविका के संकट का समाधान करने के लिए शनि पुष्य के दिन पंचामृत से शिव का अभिषेक करें।
पुष्य नक्षत्र के मानक

पुष्य नक्षत्र के मानक

  • नक्षत्र देवता: बृहस्पति
  • नक्षत्र स्वामी: शनि
  • राशि: कर्क
  • राशि स्वामी: चंद्र
  • वर्ण: ब्राह्मण
  • वश्य: जलचर
  • योनि: मेढ़ा
  • गण: देव
  • नाड़ी: मध्य

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