Sawan 2020: पढ़ें भस्मासुर और भोले बाबा की कहानी

नई दिल्ली। देव- दानव काल में कई असुरों ने घोर तपस्या कर ईश्वर को प्रसन्न किया और मनचाहा वरदान पाया था। इनमें ही एक असुर महाशिव का परम भक्त था। प्रचंड नामक इस असुर की शक्तियां भी इसके नाम के अनुरूप प्रचंड थीं। सृष्टि के लिए इस असुर का अस्तित्व घातक था। लेकिन माना जाता है कि ईश्वर भी अपने भक्तों के प्रेम और भक्ति के आगे मजबूर हो जाते हैं।

Sawan 2020: पढ़ें भस्मासुर और भोले बाबा की कहानी

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    भक्त की प्रबल आस्था, प्रेम और तपस्या के आगे ईश्वर को झुकना ही पड़ता है। यही इस घटना में भी हुआ। प्रचंड शिव का अनुरक्त भक्त था। उसने कई वर्षों तक घोर तपस्या की और शिव को प्रसन्न कर लिया। शिव जी ने प्रकट होकर उसे वरदान मांगने को कहा। प्रचंड ने अमरता का वरदान मांगा, पर यह संभव ना था। ऐसे में उसने शिव जी से वरदान मांगा कि वह जिसके सिर पर हाथ रखे, वह भस्म हो जाए। शिव जी ने वरदान दे दिया। इसके बाद से ही प्रचंड को भस्मासुर के नाम से जाना गया।

    भस्मासुर अहंकारी और उद्दंड हो गया

    शिव से मनचाहा वर पाकर भस्मासुर अहंकारी और उद्दंड हो गया। वह हर किसी को भस्म करने लगा और देखते ही देेखते पूरी सृष्टि उसके आतंक से थर्रा गई। अब भस्मासुर स्वयं को सृष्टि का भगवान मानने लगा। उसके मन में शिव के लिए कुविचार आ गया। वास्तव में यह ईश्चर की ही लीला थी, ताकि भस्मासुर का संहार किया जा सके। अपनी शक्ति के मद में चूर होकर भस्मासुर शिव जी के सिर पर हाथ रखकर उन्हें भस्म करने दौड़ा। अब भोले- भंडारी आगे- आगे और भस्मासुर उनके पीछे- पीछे दौड़ते चले। वरदान शिव जी का था, सो सृष्टि में उसकी कोई काट नहीं थी। स्वयं महाशिव भी उसे बदल नहीं सकते थे। ऐसे में उन्होंने श्री विष्णु को सहायता के लिए पुकारा। श्री हरि ने अपनी माया से मोहिनी का रूप धर कर भस्मासुर को मोहित कर लिया और उसका हाथ उसके ही सिर पर रखवा दिया। इस तरह भस्मासुर का अंत हुआ। वास्तव में भस्मासुर के अंत के लिए ही परम शक्तियों ने मिलकर यह माया रची थी, पर देखने पर यही ज्ञात होेता है कि अपात्र को वरदान देकर शिव जी भी समस्या ग्रस्त हो गए थे।

    जब भी दान दें, सोच- समझकर सुपात्र को ही चुनें

    तो दोस्तों, जब भी दान दें, सोच- समझकर सुपात्र को ही चुनें क्योंकि आपके द्वारा दिए गए दान के कई दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं। यह कथा तो स्वयं ईश्वर की रची माया थी, पर आपका गलत चुनाव आपके लिए भी हानिकारक हो सकता है। तो कुपात्र को नहीं, सुपात्र को चुनें।

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