बहन यमुना को मायके लेकर चल दिए यमराज

आज के दिन लोग भाई दूज के रूप में मनाते हैं लेकिन आज के इस पवित्र दिन के कई महत्व हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार आज के दिन यमराज अपनी बहन को लेने उसके ससुराल यानि यमुनोत्री जाते हैं और उसे मायके लेकर आते हैं।
गोवर्धन पीठाधीश्वर कृष्णदास कंचन महराज के अनुसार दीपावली के पांच महोत्सवों का अन्तिम सोपान यम द्वितीया है। इसे कई लोग भाई दूज भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि ऋषि कश्यप एवं अदिति के संयोग से सूर्य अवतरित हुए थे जिनके संज्ञा, राका और प्रभा नामक तीन रानियां थीं। रानी संज्ञा के गर्भ से पुत्र के रुप में यम तथा पुत्री के रुप में यमी(यमुना) का जन्म हुआ था। भगवान सूर्य ने यम को नर्कलोक तथा यमी को देवलोक का शासन सौंपा था।
पिता की आज्ञा से यम देव ने यम लोक बसाया तथा दण्ड देने का कार्यभार संभाला जबकि यमुना ने श्री कृष्ण के अवतार के पहले भू लोक पर आकर मथुरा में विश्राम घाट पर जल महल बनवाया और वहीं तपस्या में लीन हो गयीं। कंचन महराज के अनुसार यमराज राजकाज में इतना अधिक व्यस्त हो गये कि उन्हें बहन यमुना की याद ही नहीं रही।
यम द्वितीया से पहले सभा के सदस्यों ने अपनी बहनों के घर जाने के लिए अवकाश मांगा तो यम को यमुना की याद आयी। यमराज यम द्वितीया के दिन यमुना के घर पहुंच गये। यमुना ने अपने भाई का इतना अधिक सत्कार किया कि वह भावविभोर हो गये और उन्होंने यमुना से वरदान मांगने को कहा। यमुना ने कहा कि
दीपावली के बाद यम द्वितीया के दिन जो बहनें अपने भाइयों का टीका करें उनकी रक्षा हो। यह वरदान देकर यमराज ने यमुना से एक और वरदान मांगने को कहा।
यमुना ने कहा कि जो लोग इस दिन यमुना में स्नान करें वे उनके लोक न जायें। इस मांग पर यमराज धर्मसंकट में पड गये और यमुना से इसमें संशोधन करने को कहा क्योंकि ऐसा होने पर तो उनका लोक ही खाली हो जाता। इस पर यमुना ने उनसे यह वरदान लिया कि यम द्वितीया पर जो भाई बहन साथ-साथ विश्राम घाट पर यमुना में स्नान करेंगे वे यम लोक नहीं जायेंगे। इसके बाद से ही यम द्वितीया पर भाई बहन साथ साथ यमुना में डुबकी लगाते हैं तथा निकट बने धर्मराज मन्दिर में दर्शन करते हैं।












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