Brahma Temple: केवल पुष्कर में ही क्यों है 'ब्रह्मा जी' का मंदिर? 23 साल बाद PM मोदी करेंगे दर्शन
Pushkar'S Brahma Temple: पुष्कर के 'ब्रह्मा मंदिर' के बारे में कहा जाता है यहां जो भी मांगा जाता है, वो जरूर पूरा होता है।

Pushkar'S Brahma Temple: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज पुष्कर के विश्वप्रसिद्ध 'ब्रह्मा मंदिर' में पूजा-अर्चना करेंगे। मालूम हो कि इसके पहले पीएम नरेंद्र मोदी नवंबर 2000 में पुष्कर में भाजपा के प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेने आए थे। यानी कि वो पूरे 23 साल बाद यहां आ रहे हैं। गौरतलब है कि पीएम मोदी पुष्कर में दर्शन करने के बाद ही अजमेर में एक जनसभा को संबोधित करेंगे, पीएम मोदी के आगमन के लिए यहां पर एक अस्थाई हेलीपैड बनाया गया है।
विश्व का इकलौता प्राचीन 'ब्रह्म मंदिर'
आपको बता दें कि पुष्कर में विश्व का इकलौता प्राचीन ब्रह्म मंदिर है, जहां ब्रह्मा जी की पूजा होती है, जो कि काफी मानक हैं। इस बारे में एक कहानी प्रचलित है कि ब्रह्मांड की रचना करने वाले ब्रह्मा जी को धऱती पर यज्ञ करने का विचार आया और इसलिए उन्होंने अपने कमल के फूल की एक कली धरती पर गिराई, जहां वो कली गिरी, वो जगह पुष्कर थी। कमल की कली गिरने से वहां एक सरोवर बन गया था।
ब्रह्मा जी किया गायित्री देवी से विवाह
ब्रह्मा जी वहां अपने मित्रों और पंडितों के साथ यज्ञ करने पहुंचे लेकिन साथ में उनकी पत्नी सावित्री नहीं आईं, ब्रह्मा जी ने पहले उनका इंतजार किया लेकिन जब यज्ञ का मुहूर्त निकलने लगा तो उन्होंने नंदिनी गाय के मुखसे गायत्री देवी को प्रकट किया और उनसे विवाह करके यज्ञ करने के लिए बैठ गए क्योंकि यज्ञ पत्नी बिना संभव नहीं था।
सावित्री माता ने दिया श्राप
ऐसे में थोड़ी देर बाद सावित्री माता वहां पहुंची लेकिन जब उन्होंने अपने पति के बगल में किसी और स्त्री को बैठे हुए पाया तो उनका पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने श्राप देते हुए कहा कि ह्रे ब्रह्मा आप सृष्टि के रचयिता हैं लेकिन आपकी पृथ्वी पर कहीं भी पूजा नहीं होगी।
ब्रह्मा जी समेत सभी देवताओं को काफी दुख पहुंचा
सावित्री के बात सुनकर ब्रह्मा जी समेत सभी देवताओं को काफी दुख पहुंचा, देवी देवताओं ने सावित्री को गायित्री देवी के प्रकट होने की वजह भी बताई और कहा कि वो अपना श्राप वापस ले लें। पूरी बात सुनने के बाद सावित्री का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने तब कहा कि 'श्राप तो वापस नहीं लिया जा सकता है लेकिन अब धरती पर सिर्फ पुष्कर में ही ब्रह्मा जी की पूजा होगी और इसके बाद ही पुष्कर में ब्रह्मा जी का मंदिर बना।'
मंदिर की खूबसूरती अलौकिक है
हर साल यहां लाखों की संख्या में श्रद्दालुगण दर्शन करने के लिए आते हैं। पुराणों के मुताबिक मंदिर का निर्माण तो करीब 2000 साल पहले हुआ था लेकिन इसमें वास्तुकला का काम 14वीं शताब्दी में हुआ था। पुष्कर सरोवर ओर मंदिर की खूबसूरती अलौकिक है इसलिए ये स्थान पर्यटन के लिहास से भी काफी लोकप्रिय है।












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