Navratri 2021: 13 या 14,कब है 'महाअष्टमी'? कैसे करें मां गौरी को प्रसन्न, क्या है पूजा का मंत्र?
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर। बुधवार को महागौरी की दिन यानी कि 'महाअष्टमी' है। जो लोग नौ दिन का उपवास रखते हैं तो वो तो कल व्रत रखेंगे ही लेकिन जो लोग पहले दिन का व्रत का रखते हैं, वो भी कल ही व्रत रखेंगे, आम भाषा मे कहा जाए तो चढ़ती-उतरती रहने वाले लोग अष्टमी पर नवरात्रि का उपवास रखते हैं। मां गौरी का रूप सरस, सुंदर और कोमल हैं तो वहीं मां गौरी भक्तों की हर इच्छा की पूर्ति बड़े प्यार से करती हैं। ये मां पार्वती की रूप कही जाती हैं तो इन्हें ही विघ्नहर्ता गणेश जी का माता का गौरव प्राप्त है।

इस बार लोगों में अष्टमी की तिथि को लेकर थोड़ा सा असमंजस है। वो व्रत 13 को रहें या 14 को यही सवाल बार-बार किया जा रहा है तो उनके लिए ये बता देते हैं कि 'अष्टमी कल ही है, इस बार एक दिन का क्षय होने के कारण इस बार नवरात्रि 8 दिनों की है इसलिए अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर को ही रखा जाएगा।'
अष्टमी को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति
इस बार दुर्गा अष्टमी, महानवमी और दशहरा की तिथियों को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति है। हिंदी पंचांग पर आधारित तिथियां उस तरह काम नहीं करतीं जैसे अंग्रेजी कैलेंडर में तिथियां यानी 24 घंटे के पैटर्न में होती हैं। ये तिथियां 24 घंटे से कम और कभी-कभी इससे भी लंबी हो सकती हैं। कई बार ये तिथियां एक ही तिथि को पड़ती हैं, जिसके कारण एक ही दिन दो व्रत या त्योहार पड़ जाते हैं।
अष्टमी तिथि और शुभ मुहूर्त
दरअसल महाअष्टमी तिथि 12 अक्टूबर 2021 को रात 09.47 बजे शुरू होगी और 13 अक्टूबर 2021 को रात 08.07 बजे समाप्त होगी। व्रत रखने वाले भक्त 13 अक्टूबर को उपवास रख सकते हैं।

महा अष्टमी के महत्व को समझना
दुर्गा पूजा पूरे देश में बहुत धूमधाम से मनाई जाती है। अष्टमी के दिन बहुत सारे लोग कन्या-पूजन करते हैं, उन्हें पेट भर भोजन के साथ -साथ कुछ चीजें भेंट की जाती हैं। छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का ही रूप माना जाता है। आम तौर पर कन्याओं को चना. पुड़ी, हलवा या खीर का भोजन खिलाया जाता है।
मां गौरी को अर्पण करें ये भोग
मां गौरी को प्रसन्न करने के लिए भोग के रूप में नारियल का भोग लगाया जाता है। प्रसाद के लिए आप नारियल के लड्डू या बर्फी भी बना सकते हैं,इसके अलावा इस दिन पूरी, चना और हलवा का पारंपरिक भोग भी लगाया जाता है, ये मां दुर्गा का सबसे प्रिय भोग है।

इन मंत्रों से करें मां गौरी को प्रसन्न
- श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
- महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
- या देवी सर्वभूतेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
- नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।












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