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Religion: माला से कब और कैसे करें जाप, जानिए क्या है इसका महत्व?

By पं. अनुज के शुक्ल
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लखनऊ। मन्त्र गणना की निश्चित संख्या में जपने का सर्वश्रेष्ठ साधन माला है। पृथ्क-पृथ्क तरीके से भी लोग मन्त्र जाप करते हैं। कुछ उंगलियों के पोर से चावल आदि से भी गणना करते हैं किन्तु माला से जाप का पूर्णतया वैज्ञानिक आधार है, ये पूर्ण शुद्ध सात्विक है। भिन्न-भिन्न प्रयोजनार्थ पृथ्क-पृथ्क माला का विधान है। तदनुसार ही जाप का पूर्ण फल होता है।प्रत्येक श्वांस के साथ एक मन्त्र जाप श्रेष्ठ कहलाता है। माला धारण करने से या पूजन करने से मन सात्विक चर्म, अस्थि, रक्त, प्रवाह, वात संस्थान व संवेगों का प्रसार होता है। आयुर्वेद व एक्यूप्रेशर में माला जाप श्रेष्ठ है। माला सदैव गौमुखी में ही जपें। मालाओं के विषय में आप सभी बहुत कुछ जानते है, अतः हम जप के प्रकार और माला की उपयोगिता पर चर्चा करते है।

जाप तीन प्रकार के होते है-

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English summary
A Japamala or mala is a string of prayer beads commonly used by Hindus, Buddhists, Jains and some Sikhs for the spiritual practice known in Sanskrit as japa. It is usually made from 108 beads, though other numbers are also used.
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