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Quartz & Rock Crystal Astrology: स्फटिक की माला के चमत्कार

स्फटिक जिसे बिल्लौर भी कहते हैं। ये कई रंगों में मिलता है व पारदर्शी होता है, अतः पारदर्शी माला भी कहते हैं। यह स्मृद्धि, धन, लक्ष्मी आगमन हेतु सर्वश्रेष्ठ होती है।

Crystal Astrology Benefit

लखनऊ। स्फटिक जिसे बिल्लौर भी कहते हैं। ये कई रंगों में मिलता है व पारदर्शी होता है, अतः पारदर्शी माला भी कहते हैं। यह स्मृद्धि, धन, लक्ष्मी आगमन हेतु सर्वश्रेष्ठ होती है। इसे सौम्य व शुभ सात्विक कार्यो में प्रयोग करते है। यह देवी, शिव व चन्द्र को प्रिय है। अतः वशीकरण, शान्ति, कर्म व समृद्धि हेतु इसे धारण करना सर्वश्रेष्ठ होता है।

  • स्फटिक की माला को विधिवत पूजन करके गले में धारण करने से धीरे-धीरे धन में वृद्धि होने लगती है।
  • जिस व्यक्ति के उपर लगातार ऋण का बोझ बढ़ रहा हो वह व्यक्ति घर के ईशान कोण में जल का कलश रखकर स्फटिक माला जल में रखें व शुक्रवार को लक्ष्मी जी की आराधना करने से लाभ अवश्य मिलेगा।
  • मानसिक तनाव दूर करने व शीतलता प्रदान करने के लिए स्फटिक की माला से कम से 1008 मन्त्रों का जाप करके इस माला को गले में पहने से चमत्कारिक लाभ मिलता है।
  • स्फटिक की माला शुक्र ग्रह से सम्बन्धित होती है। यदि आपका शुक्र ग्रह कमजोर है या फिर पीड़ित तो शुक्रवार के दिन स्फटिक की माला से ''ऊॅ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः'' मन्त्र की कम से कम एक माला जाप जरूर करें। ऐसा करने से धीमे-धीमे आपका शुक्र मजबूत होकर अच्छा फल देने लगेगा।
  • घर में क्लेश मिटाने के लिए स्फटिक की माला से पार्वती जी के इस मन्त्र ''ऊॅ गौरये नमः'' का जाप करें और इसी माला को गले में धारण करें। यह उपाय श्रद्धापूर्वक करने से अवश्य लाभ मिलता है।
  • विद्या प्राप्ति के लिए सरस्वती जी के इस ''ऊॅ ऐं'' मन्त्र का स्फटिक की माला से जाप करने से विद्या के क्षेत्र में अपार सफलता मिलती है।
  • जिन लोगों को उच्च रक्त या अधिक क्रोध आता है उन लोगों को स्फटिक की माला पहनने से अत्यन्त लाभ मिलता है।
  • जिन पति-पत्नियों में आपसी झगड़ा अधिक होता है और प्रेम न के बराबर है। ऐसे में पति-पत्नी दोनों लोगों को एक-एक स्फटिक की माला पहनने से आपसी पे्रम में वृद्धि होती है।
  • माला पहनने की विधि-शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार को पहले जल व दूध में स्फटिक की माला को डाल दें, उसके बाद गायत्री मन्त्र की कम से कम एक माला का जाप करें फिर सूर्योदय होने के 3 घण्टे के अन्दर माला को पहन लेना चाहिए।
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