MahaShivaratri 2020: जानिए कौन हैं भगवान शिव, इस शिवरात्रि पर कीजिए 12 ज्योर्तिलिंगों के दर्शन

वाराणसी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर दुनिया भर में सुबह से बम-बम भोले के स्वर गूंज रहे हैं। भगवान शिव के दर्शन के लिये सभी शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्‍तों का तांता लगा हुआ है। वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर उज्जैन में महाकाल के मंदिर तक, लखनऊ के मनकामेश्वर से लेकर बेंगलूरु के केम्प फोर्ट मंदिर तक लोगों की भारी भीड़ दिखाई दे रही है, लेकिन शक्ति के पर्याय और भोलनाथ आखिर हैं कौन, क्या कभी आपने ये जानने की कोशिश की है, अगर नहीं तो चलिए हम बताते हैं।

'शिव' के नाम का मतलब शुभ होता है...

'शिव' के नाम का मतलब शुभ होता है...

शिव के नाम का मतलब शुभ होता है, भगवान शिव को संहार का देवता कहा जाता है। भगवान शिव सौम्य आकृति एवं रौद्ररूप दोनों के लिए विख्यात हैं। अन्य देवों से शिव को भिन्न माना गया है। सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति एवं संहार के अधिपति शिव हैं। त्रिदेवों में भगवान शिव संहार के देवता माने गए हैं।

शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं...

शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं...

शिव अनादि तथा सृष्टि प्रक्रिया के आदिस्रोत हैं और यह काल महाकाल ही ज्योतिषशास्त्र के आधार हैं। शिव का अर्थ यद्यपि कल्याणकारी माना गया है, लेकिन वे हमेशा लय एवं प्रलय दोनों को अपने अधीन किए हुए हैं। रावण, शनि, कश्यप ऋषि आदि इनके भक्त हुए हैं।

देवों से लेकर असुरों तक के प्रिय हैं शिव

देवों से लेकर असुरों तक के प्रिय हैं शिव

शिव इकलौते ऐसे भगवान हैं जो देवों से लेकर असुरों तक के प्रिय हैं। इंद्र-कुबेर से लेकर हिरण्यकश्यप और रावण तक शिव को सच्चे मन से पूजते थे। श्रीला व्यासदेव ने शिव को महान महर्षि के रूप में वर्णित किया है। जिसने भी उनकी निस्वार्थ होकर बिना शर्त से पूजा की, उसे शिव ने अपना आशीष दिया है।

शिव का घर कैलाश पर्वत था

शिव का घर कैलाश पर्वत था

कहा जाता है कि शिव का घर कैलाश पर्वत था। वहां वो एक बरगद के पेड़ के नीचे रहते थे जो काफी विशाल था। ये पेड़ 1287 किलोमीटर लंबा और 965 किलोमीटर चौड़ा था। इसी पेड़ के नीचे शिव मां पार्वती और अपने बेटों के साथ रहते थे। उनका प्रिय बैल नंदी भी यहीं रहता था।

क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि

क्यों मनाते हैं महाशिवरात्रि

पौराणिक कथाओं के मुताबिक महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे, इसी दिन पहली बार शिवलिंग की भगवान विष्णु और ब्रह्माजी ने पूजा था, इस घटना के चलते महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग की विशेष पूजा की जाती है।

 भगवान शंकर और माता पार्वती का विवाह

भगवान शंकर और माता पार्वती का विवाह

दूसरी प्रचलित कथा के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शंकर और माता पार्वती का विवाह हुआ था, इसी वजह से नेपाल में महाशिवरात्रि के तीन दिन पहले से ही मंदिरों को मंडप की तरह सजाया जाता है. मां पार्वती और शिव जी को दूल्हा-दुल्हन बनाकर घर-घर घुमाया जाता है और महाशिवरात्रि के दिन उनका विवाह कराया जाता है।

शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है...

शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है...

हिन्दू धर्म में पुराणों के अनुसार शिवजी जहां-जहां स्वयं प्रकट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है, ये संख्या में 12 है।

इनके नाम हैं

इनके नाम हैं

  • सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (गुजरात )
  • मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग (आंध्र प्रदेश)
  • महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (उज्जैन, मध्य प्रदेश)
  • ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (इंदौर, मध्य प्रदेश)
  • केदारनाथ ज्योतिर्लिंग (उत्तराखंड)
  • भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग( पुणे, महाराष्ट्र)
शिव पूजा से दूर होते हैं सारे कष्ट

शिव पूजा से दूर होते हैं सारे कष्ट

  • काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग( उत्तर प्रदेश)
  • त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग (नासिक, महाराष्ट्र )
  • वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग( झारखंड)
  • नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (द्वारिका, गुजरात)
  • रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग( तमिलनाडु)
  • घृष्णेश्वर मन्दिर ज्योतिर्लिंग (दौलताबाद, महाराष्ट्र)

मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना

मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना

भक्तगण उपवास रखकर और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं। देशभर में लाखों श्रद्धालु महाशिवरात्रि मना रहे हैं। माना जाता है कि आज ही के दिन भगवान शिव व देवी पार्वती का विवाह हुआ था।

महादेव से आशीर्वाद मांगते हैं

महादेव से आशीर्वाद मांगते हैं

आज श्रद्धालु पूरी रात जागते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और महादेव से आशीर्वाद मांगते हैं। कहते हैं कि महाशिवरात्रि में किसी भी प्रहर अगर भोले बाबा की आराधना की जाए, तो मां पार्वती और भोले त्रिपुरारी दिल खोलकर कर भक्तों की कामनाएं पूरी करते हैं।

ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था

ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था

महाशिवरात्रि के दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं, इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया।

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