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Maa Kalratri Puja Vidhi: शारदीय नवरात्रि की सप्तमी आज, कैसे करें मां कालरात्रि को प्रसन्न? नोट कर लें मंत्र!

Maa Kalratri Puja Vidhi-Mantra: शारदीय नवरात्रि का हर दिन मां दुर्गा के अलग-अलग रूप को समर्पित होता है। इस क्रम में सप्तमी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन मां के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है। कालरात्रि को महाकाली और महाचंडी का स्वरूप भी कहा जाता है। मां का यह रूप दुष्टों का संहार कर अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों के सभी भय दूर हो जाते हैं, अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और जीवन में सुख, साहस और समृद्धि आती है।

माता का रूप जितना भयंकर दिखता है, उतना ही कोमल और करुणामय उनका हृदय है। भक्त जब पूरे श्रद्धा भाव से मां की आराधना करते हैं, तो उनके जीवन की नकारात्मक ऊर्जा, बाधाएं और कष्ट समाप्त हो जाते हैं। सप्तमी के दिन भक्त नारंगी रंग का वस्त्र धारण कर, मां को लाल फूल और गुड़ का भोग अर्पित करते हैं। साथ ही विशेष मंत्रों और आरती के माध्यम से उनका आशीर्वाद पाते हैं।

Maa Kalratri Puja Vidhi

मां कालरात्रि का स्वरूप

मां कालरात्रि का शरीर अंधकार की तरह काला है। उनके चार हाथ और तीन नेत्र हैं। एक हाथ में तलवार, दूसरे में लौह शस्त्र, तीसरे हाथ में वरमुद्रा और चौथे हाथ में अभय मुद्रा है। मां के बिखरे हुए लंबे बाल और उनकी श्वास से निकलती अग्नि उन्हें और भी अद्भुत बनाती है।
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पूजा का शुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 04:37 से 05:25
  • अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11:47 से 12:35
  • विजय मुहूर्त - दोपहर 02:11 से 02:58
  • गोधूलि मुहूर्त - शाम 06:09 से 06:33
  • अमृत काल - रात 11:15 से 01:01 (29 से 30 सितम्बर)

भोग और प्रिय वस्तुएं (Maa Kalratri ka Bhog)

मां कालरात्रि को गुड़ का भोग सबसे प्रिय है। भक्त उन्हें गुड़, गुड़ की खीर या गुड़ से बनी मिठाइयों का प्रसाद चढ़ाते हैं।

मंत्र और आराधना (Kalratri Mata ka Mantra)

पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है -
"ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नमः।"

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥

मां को गुलाब या गुड़हल के फूल अर्पित करें।

पूजा विधि

  • सुबह स्नान करके मंदिर को साफ करें।
  • गंगाजल से माता का अभिषेक करें।
  • चुनरी, अक्षत, सिंदूर और लाल-पीले पुष्प अर्पित करें।
  • फल, मिठाई और गुड़ का भोग लगाएं।
  • धूप और घी का दीपक जलाएं।
  • दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
  • पान के पत्ते पर कपूर और लौंग रखकर आरती करें।
  • अंत में माता से क्षमा प्रार्थना करें।

मां कालरात्रि की आरती (Kalratri Mata ki Aarti)

कालरात्रि जय-जय-महाकाली।
काल के मुह से बचाने वाली॥

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।
महाचंडी तेरा अवतार॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा।
महाकाली है तेरा पसारा॥

खडग खप्पर रखने वाली।
दुष्टों का लहू चखने वाली॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
सब जगह देखूं तेरा नजारा॥

सभी देवता सब नर-नारी।
गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥

रक्तदंता और अन्नपूर्णा।
कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥

ना कोई चिंता रहे बीमारी।
ना कोई गम ना संकट भारी॥

उस पर कभी कष्ट ना आवें।
महाकाली माँ जिसे बचाबे॥

तू भी भक्त प्रेम से कह।
कालरात्रि माँ तेरी जय॥

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डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। पाठकों से अनुरोध है कि इसे अपनी आस्था और विश्वास के आधार पर स्वीकार करें।

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