Lalita Panchami 2022: संकटों का निवारण करती हैं देवी ललिता
नई दिल्ली, 28 सितंबर। आश्विन नवरात्र के पांचवें दिन देवी ललिता का पूजन किया जाता है। इसे ललिता पंचमी के नाम से जाना जाता है। ललिता पंचमी 30 सितंबर 2022 शुक्रवार को आ रही है। देवी ललिता दस महाविद्याओं में से एक है और इन्हें त्रिपुर सुंदरी और षोडशी के नाम से भी जाना जाता है। देवी ललिता का पूजन करने से समस्त कष्टों का निवारण होता है। घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है और समस्त रोगों का नाश होता है।

कैसे करें पूजन
ललिता पंचमी के दिन सूर्योदय पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर अपने घर के पूजा स्थान को साफ-स्वच्छ कर लें। उत्तर दिशा की ओर मुंह करके बैठें। पूजन कर ललिता पंचमी व्रत का संकल्प लें। पंचदेवों का पूजन करें। इनमें श्रीगणेश, भगवान शिव, माता दुर्गा, श्रीहरि विष्णु भगवान और सूर्य देव का पूजन करें। इसके बाद अशोक सुंदरी माता की आराधना करें। उनसे सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करें। माता ललिता के सामने शुद्ध घी का दीपक लगाएं और ललिता सहस्रनामावली का पाठ करें। ललिता पंचमी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
ललिता पंचमी व्रत कथा
एक समय देवी सती के पिता राजा दक्ष प्रजापति ने एक यज्ञ का आयोजन किया। इसमें समस्त देवी-देवताओं को आमंत्रित किया किंतु भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिया। शिव ने सती को भी यज्ञ में जाने से मना किया किंतु सती बिन बुलाए ही पिता के यज्ञ में पहुंच गई। वहां देखा किसभी उनके पति शिव का तिरस्कार कर रहे थे। पिता दक्ष भी शिवजी की निंदा कर रहे थे। इससे व्यथित होकर सती ने यज्ञ कुंड में कूदकर अपने प्राण दे दिए। देवी सती मे वियोग में भोलेनाथ उनकी पार्थिव देह को लेकर संपूर्ण ब्रह्मांड में भटकने लगे। भोलेनाथ का मोह भंग करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती की देह के टुकड़े कर दिए। जहां-जहां सती के अंग गिरे वहां शक्तिपीठ बन गए। नैमिषारण्य में सती का हृदय गिरा जिसे भगवान शिव ने अपने हृदय में धारण कर लिया, इसी कारण वह ललिता कहलाई।
- पंचमी तिथि प्रारंभ : 30 सितंबर रात्रि 12.08 बजे
- पंचमी तिथि पूर्ण : 30 सितंबर रात्रि 10.38 बजे












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