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Kharmas 2024: आज से लगा खरमास, अब एक महीने बंद रहेंगे बैंड-बाजा-बारात, नहीं होंगे शुभ काम

Kharmas 2024:खरमास को हिंदू धर्म में आत्मचिंतन का वक्त माना जाता है। इसे पौषमास के नाम से भी जाना जाता है। ज्योतिषीय दृष्टि से जब सूर्य बृहस्पति की राशि धनु या मीन में प्रवेश करता है, तब खरमास की शुरुआत होती है। यह समय मुख्यतः धार्मिक कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है लेकिन इस दौरान सभी मांगलिक काम बंद रहते हैं।

इस साल खरमास का प्रारंभ आज से लग रहा है। पंचांग के अनुसार, आज रात 10:19 बजे सूर्य धनु राशि में प्रवेश करने वाले हैं, इसे धनु संक्रान्ति भी कहते हैं, जैसे ही सूर्य की राशि बदलेगी वैसे ही खरमास प्रारंभ हो जाएगा।

Kharmas 2024

इसकी समाप्ति 14 जनवरी 2025 को तब होगी जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे कि मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है, इस दिन से सभी शुभ काम प्रारंभ हो जाएंगे।

खरमास का महत्व हम निम्नलिखित बिंदुओं से समझ सकते हैं...

  • आध्यात्मिक उन्नति का समय: खरमास के दौरान भगवान विष्णु की पूजा और भक्ति करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं। इसे ध्यान, साधना, और ईश्वर के प्रति समर्पण का माह माना जाता है।
  • शुभ कार्यों पर रोक: इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करने जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।
  • तप और धर्म-कर्म पर जोर: खरमास में संयमित जीवन की बात कही गई है। इस दौरान तप और धर्म-कर्म में ध्यान लगाने पर जोर दिया जाता है।

खरमास में भगवान विष्णु चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए इससे मन को शांति मिलती हैं और इंसान के सारे कष्टों का अंत भी हो जाता है...

विष्णु चालीसा (Vishnu Chalisa)

दोहा

  • विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
  • कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ॥

विष्णु चालीसा

  • नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
  • प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ॥
  • सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
  • तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ॥
  • शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
  • सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ॥
  • सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
  • सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ॥
  • पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
  • करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ॥
  • धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
  • भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ॥
  • आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
  • धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया ॥
  • अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
  • देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया ॥
  • कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
  • शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ॥
  • वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
  • मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ॥
  • असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
  • हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई ॥
  • सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
  • तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी ॥
  • देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
  • हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी ॥
  • तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।
  • गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे ॥
  • हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।
  • देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे ॥
  • चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।
  • जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ॥
  • शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।
  • करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ॥
  • करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।
  • सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ॥
  • दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई ।
  • पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ ॥
  • सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।
  • निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै ॥

॥ इति श्री विष्णु चालीसा ॥

DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।

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