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Kartik Purnima Vrat 2019 : जानिए कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

नई दिल्ली। कार्तिक माह का समापन कार्तिक पूर्णिमा के साथ 12 नवंबर 2019 को हो जाएगा। इस माह में दान, धर्म, जप, तप, दीपदान, व्रत आदि करने का बड़ा पुणयफल माना गया है। कार्तिक माह में अनेक लोग ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान, पूजा आदि कर लेते हैं, लेकिन यदि जो लोग पूरे माह जल्दी उठकर स्नान आदि ना कर पाएं उनके लिए एक अत्यंत पवित्र दिन निर्धारित हैं। शास्त्रों का कथन है कि रोगी, वृद्ध, बालक या किसी कार्य से नगर के बाहर जाने वाले लोग यदि पूरे कार्तिक माह व्रतादि ना कर पाएं तो वे इस माह के अंतिम दिन यानी कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा में डुबकी लगाकर पूरे माह का फल प्राप्त कर सकते हैं। कार्तिक पूर्णिमा को देव दीवाली भी कहा जाता है। इस दिन दीपदान का बड़ा महत्व है। कहा जाता है इससे अक्षय पुण्यफलों की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूर्ण कृपा प्राप्त होने से धन-संपत्ति के भंडार भर जाते हैं।

 कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

शास्त्रों में कार्तिक माह की पूर्णिमा को सबसे बड़ी पूर्णिमा कहा गया है। इस दिन को त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है और यह भगवान शंकर के विजय दिवस के रूप में भी मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान शंकर ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के साथ शिव का पूजन अवश्य करना चाहिए। इस दिन भगवान शिव का विधि-विधान से पूजन करने से व्यक्ति अत्यंत धनवान बनता है। कार्तिक पूर्णिमा का पूजन सायंकाल प्रदोषकाल में करने का विधान है।

कैसे करें कार्तिक पूर्णिमा

कैसे करें कार्तिक पूर्णिमा

कार्तिक पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान का बड़ा महत्व है। इस दिन हरिद्वार, इलाहाबाद, उज्जैन, ओंकारेश्वर, गंगासागर आदि में स्नान करने के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा की संध्या के समय भगवान विष्णु का मत्स्यावतार भी हुआ था, इसलिए इस दिन गंगा स्नान के बाद दीप-दान करना चाहिए। इससे दस यज्ञों के समान मिलता है। पूर्णिमा के दिन प्रात: काल उठकर व्रत का संकल्प लेकर व्रती पवित्र नदी या तालाब पर स्नान करते हैं। स्नान के बाद यथाशक्ति दान-पुण्य किए जाते हैं। इस दिन बनारस में विशेष धार्मिक अनुष्ठान होता है।


सिखों का महत्वपूर्ण पर्व इसी दिन

कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही सिखों के पहले गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था। सिख समुदाय के लोग इस दिन को प्रकाश उत्सव और गुरु पर्व (गुरु परब) के रूप में मनाते हैं।इस दिन गुरु ग्रंथ साहिब में लिखी नानक देव जी की शिक्षाओं का पाठ किया जाता है। अमृतसर का गोल्डन टेंपल इस दिन रोशनियों से जगमगा उठता है।

ये उपाय करें कार्तिक पूर्णिमा के दिन

ये उपाय करें कार्तिक पूर्णिमा के दिन

  • यदि आप वर्ष की किसी पूर्णिमा का व्रत नहीं रखते हैं तो कार्तिक पूर्णिमा का व्रत जरूर रखें। इस पूरे दिन अन्न् ग्रहण ना करें। पूरे दिन व्रत रखकर रात्रि में बछड़ा दान करने से शिव प्रसन्न् होते हैं। इससे वंश वृद्धि होती है। उत्तम गुणों वाले, सदाचारी पुत्र-पुत्रियों की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन भगवान शिव का अभिषेक करने से समस्त सुखों की प्राप्ति होती है। कहा जाता है इससे वाजपेयी यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है।
  • कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा में स्नान करने से जाने-अनजाने में किए गए पापों का प्रायश्चित होता है। मोक्ष की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन गंगा स्नान से समस्त ग्रह दोषों की शांति होती है। बुरे ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
  • कार्तिक पूर्णिमा के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान विष्णु की प्रतिमा को केसर के दूध से स्नान कराकर षोडशोपचार पूजन करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। इससे धन, सुख, वैभव, संपत्ति की प्राप्ति होती है।
  • इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का लाल कमल या लाल गुलाब के पुष्पों से पूजन करें और उन्हें खीर का भोग लगाने से धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।
  • इस दिन तुलसी पत्र ना तो तोड़ें और ना ही खाएं। केवल तुलसी का पूजन किया जा सकता है।

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