Hariyali Teej 2022: जानिए क्या होता सिंजारा? क्या है इसका मतलब?
नई दिल्ली, 28 जुलाई। अखंड सौभाग्य का व्रत हरियाली तीज 31 जुलाई को है। पति की लंबी उम्र के लिए रखे जाने वाले इस व्रत को बड़े ही प्रेम और उल्लास के साथ राजस्थान, यूपी , एमपी में मनाया जाता है। कहीं-कहीं इस पर्व को सावन की तीज और कजली तीज भी कहते हैं। कहीं-कहीं तो तीज के नाम पर काफी उत्सव भी मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे 16 श्रृंगार करके शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और अपने पति के लंबी उम्र की कामना करती हैं।

सिंजारा या सिंधारा तीज
आपको पता हैं कि इस पर्व को सिंजारा या सिंधारा तीज भी कहा जाता है क्योंकि इसमें लड़की के मायके से ससुराल वालों को सिंजारा (सिंधारा) भेजा जाता है, जिसमें तीज की पूरी थाल होती है, इस थाल में लड़की और लड़की की सास के लिए साड़ी, गहने, मिठाई, मेवे और श्रृंगार का पूरा सामान होता है। जिसके जरिए मायके वाले लड़की को अपना प्यार और शुभकामनाएं भेजते हैं। सिंजारा तीज से एक-दो दिन पहले आता है।

राजस्थान में सिंजारा उत्सव मनाते हैं
राजस्थान में तो लोग सिंजारा उत्सव मनाते हैं,ये तीज के एक दिन पहले होता है, जिसमें सिंजारा आने के बाद महिलाएं हाथों में मेंहदी रचाती हैं और कुछ खाती-पीती हैं क्योंकि इसी के खाने के बाद उनका व्रत शुरू हो जाता हैं। महिलाएं इस दौरान गाती भी हैं और नृत्य भी करती हैं।

सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को 'हरियाली तीज'
मालूम हो कि सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को 'हरियाली तीज' का पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि इस दिन मां पार्वती और प्रभु भोलेनाथ का पुनर्मिलन हुआ था इसलिए ये दिन प्रेम और तपस्या का मानक है। आपको बता दें कि ये व्रत केवल सुहागिन स्त्रियां ही नहीं रखती हैं, बल्कि इस तीज का उपवास कुंवारी कन्याएं या फिर जिनकी शादी तय हो जाती हैं, वो लड़कियां भी करती हैं। माना जाता है कि अगर कुंवारी कन्याएं इस व्रत को करेंगी तो उन्हें भोलेनाथ जैसे ही पति प्राप्त होंगे।

निम्मलिखित मंत्रों से करें पूजा
इस दिन मां पार्वती और प्रभु शिव दोनों की पूजा होती है इसलिए दोनों को पूजा निम्मलिखित मंत्रों से करनी चाहिए..
माता पार्वती के लिए मंत्र
- ऊं उमायै नम:
- ऊं पार्वत्यै नम:
- ऊं जगद्धात्र्यै नम:
- ऊं जगत्प्रतिष्ठयै नम:
- ऊं शांतिरूपिण्यै नम:
भोलेनाथ के लिए मंत्र
- ऊं महेश्वराय नम:
- ऊं शिवाय नम:
- ऊं पशुपतये नम:
- ऊं महादेवाय नम:












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