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Happy Onam ( Aug 22nd to 2nd Sept 2020): जानिए क्यों मनाया जाता है 'ओणम' का पर्व?

नई दिल्ली। आस्था, प्रेम और विश्वास के पर्व 'ओणम' की शुरुआत 22 अगस्त से हो चुकी है, मुख्य रूप से केरल में मनाए जाने वाला ये पर्व दस दिनों का होता है, इस बार ये पर्व 2 सितंबर को खत्म होगा। कोरोना संकट के बीच इस त्योहार की चमक इस बार राज्य में फीकी है लेकिन भक्तगण अपने-अपने घरों में ही अपने अंदाज में नए साल का स्वागत कर रहे हैं, दरअसल केरलवासी ओणम को अपना 'न्यूईयर' मानते हैं, उनके लिए ये धार्मिक त्‍योहार से ज्यादा एक सांस्‍कृतिक पर्व है जो कि फसल के लिए मनाया जाता है, इस बार सभी अपने ईष्ट देव से प्रार्थना कर रहे हैं कि जल्दी से पूरी दुनिया को कोरोना संकट से मुक्ति मिले।

चलिए जानते हैं 10 दिन तक चलने वाले इस खूबसूरत पर्व के बारे में कुछ खास बातें

'ओणम' पर सभी लोग अपने घरों को फूलों से सजाते हैं,

'ओणम' पर सभी लोग अपने घरों को फूलों से सजाते हैं,

'ओणम' पर सभी लोग अपने घरों को फूलों से सजाते हैं, इस दिन ही केरल में मशहूर नौका-दौड़ शुरू होती है। लोग इस दिन पारंपरिक वेशभूषा में तैयार होकर पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है कि केरल के त्रिकाकरा मंदिर में ही 'ओणम' की शुरुआत हुई थी।

क्यों मनाया जाता है ये त्योहार?

क्यों मनाया जाता है ये त्योहार?

मान्यता है कि केरल के एक राजा थे जिनका नाम था महाबलि, वो अपनी प्रजा से बहुत प्यार करते थे और बहुत बड़े दानी थे। वो कोशिश करते थे कि उनके राज्य में हर कोई खुश रहे इसलिए प्रजा उन्हें भगवान की तरह पूजा करती थी। महाबलि की ये लोकप्रियता देवताओं से देखी नहीं गई। राजा इंद्र ने भगवान विष्णु से कहा कि वो महाबलि की परीक्षा लें, विष्णु मान गये और उन्होंने ब्राह्मण वेश धारण करके महाबलि के पास पहुंचकर तीन पग जमीन की मांग की। महाबलि ने तुरंत हां कर दिया और उसके बाद विष्णु ने विराट रूप धारण करके तीन पग नापें, पहले पग में भू-लोक तथा दूसरे पग में स्वर्ग-लोक नाप लिया। तीसरे पग के लिए भूमि कम पड़ गई। इस पर महबलि के पास कोई चारा नहीं बचा, उन्होंने भगवान विष्णु से माफी मांगी तब विष्णु ने उन्हें पाताल लोक में रहने की सजा दी लेकिन एक वरदान भी दिया जो वो पाताल लोक जाने से पहले मांग सकते थे।

 महाबलि को दिखाने के लिए खुश होती है प्रजा

महाबलि को दिखाने के लिए खुश होती है प्रजा

राजा बलि अपनी प्रजा को बहुत चाहते थे। अत: उन्होंने वरदान मांगा कि, उन्हें वर्ष में एक बार अपनी प्रजा के सुख- दु:ख को देखने का अवसर मांगा जो भगवान ने दे दिया इसलिए ऐसा माना जाता है कि हर साल श्रवण नक्षत्र यानी ओणम के दिन में राजा बली अपनी प्रजा को देखने आते हैं। इसी कारण राज्य की जनता अपने महाबलि को दिखाने के लिए 'ओणम' का दिन उत्सव के रूप में मनाती हैं और नाचती-गाती है ताकि उसके राजा को लगे कि उसकी प्रजा सुखी है और उन्हें कोई तकलीफ ना हो।

'ओणम' पर्व पर घरों में खास तरह के पकवान बनते हैं

'ओणम' पर्व पर घरों में खास तरह के पकवान बनते हैं

ओणम पर्व पर घरों में खास तरह के पकवान बनते हैं, साथ ही यह पर्व नई फसल के आने की खुशी में भी मनाया जाता है, इस अवसर पर मलयाली समाज के लोगों ने एक-दूसरे को गले मिलकर शुभकामनाएं देते हैं. साथ ही परिवार के लोग और रिश्तेदार इस परंपरा को साथ मिलकर मनाते हैं, इस हाथियों का सजाकर उनकी रैली निकाली जाती है।

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