Happy Baisakhi 2024: जानें बैसाखी से जुड़ी ये दिलचस्प बातें, किसानों के लिए इस त्यौहार का है खास महत्व
Happy Baisakhi 2024: ये साल का वो वक्त है, जब वसंत ऋतु आती है और ठंडी कठोर सर्दियां चली जाती हैं।ये जश्न और उत्सव का समय है। ये फसल के मौसम की शुरुआत भी है जिसमें देश के कई राज्य जश्न में डूबे हुए हैं। भारत के कई राज्यों में वसंत फसल उत्सव की शुरुआत को नए साल की शुरुआत के तौर पर भी देखा जाता है।
चाहे पश्चिम बंगाल में 'पोइला बोइशाक' हो या तमिलनाडु में 'पुथंडु' या कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 'उगादी', पंजाब में 'बैसाखी' हो, लोग उत्सव में डूब जाते हैं और वसंत फसल उत्सव का खुले दिल से स्वागत करते हैं। इस दौरान विशेष व्यंजन बनाए जाते हैं और प्रियजनों के साथ इनका आनंद लिया जाता है।

वसंत फसल उत्सव के बारे में जानें ये खास बातें
पोइला बोइशाक: पोइला बोइशाक नए बंगाली नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन, लोग मंदिर जाकर और पूजा करके उत्सव की शुरुआत करते हैं। फिर वे घर पर पोइला बोइशाक-विशेष व्यंजन तैयार करते हैं, जिन्हें बाद में दोस्तों और परिवार के साथ खाया जाता है।
बैसाखी: ये पूरे पंजाब में मनाया जाने वाला एक पारंपरिक त्योहार है। लोग चीनी, गेहूं के आटे और घी से कड़ाह प्रसाद बनाते हैं और इसे एक-दूसरों के बीच बांटते करते हैं। वे इस दिन को गिद्दा प्रदर्शन, लोक गीतों और लंगर में भाग लेकर भी मनाते हैं।
बोहाग बिहू: असम के मुख्य त्योहारों में से एक, बोहाग बिहू एक पारंपरिक त्योहार है जो गाने और नृत्य से मनाया जाता है। यह असम में सात दिनों की अवधि में मनाया जाता है।
विशु: लोगों के दिन की शुरुआत सूर्योदय के समय विशु कानी को देखकर होती है। विशु कानी चावल, फूल, सिक्के, फल, किताबें, धोती और अन्य चीजों की एक व्यवस्था है जो एक दिन पहले परिवार के सबसे बड़े सदस्य द्वारा बनाई जाती है। इसके बगल में पारंपरिक धातु का दीपक निलाविलक्कू जलाया जाता है।
पुथंडु: पारंपरिक तमिल नव वर्ष बहुत धूमधाम और भव्यता के साथ मनाया जाता है। लोग मंदिर जाते हैं और फिर घर पर पोंगल और आम पचड़ी बनाते हैं।












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