Guru Purnima 2023: 'गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः...' जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त , स्तुति और मंत्र
Guru Purnima 2023: आषाढ़ी पूर्णिमा का दिन काफी पावन होता है, आज के दिन को गुरु पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि महाग्रंथ महाभारत और भगवदगीता समेत 18 वेदों के रचनाकार महर्षि वेद व्यास का जन्म आज ही के दिन हुआ था।
गुरु का स्थान ईश्ववर से भी ऊंचा
गुरु की महत्ता तो किसी से छिपी नहीं है, दुनिया में वो ही सफल और संतुष्ट है, जिसके पास गुरु हैं। कबीरदास ने तो गुरु का स्थान ईश्ववर से भी ऊंचा बताया है। आज को दिन आप अपने गुरुजनों को दिल से प्रणाम करते हुए उनका आभार व्यक्त कीजिए। जीवन के हर पड़ाव पर गुरु की भूमिका और रूप अलग-अलग होते हैं।

बच्चे की सबसे पहली गुरु उसकी मां होती है और उसके बाद बच्चे को शिक्षा से लेकर और उसके जीवन यापन के योग्य बनने तक एक सच्चे और अच्छे गुरु की बहुत जरूरत होती है। आज का दिन अपने गुरुओं के प्रति आदर और सम्मान को व्यक्त करने का दिन है।
आज का दिन बेहद पावन
वैसे आज पूर्णिमा है इसलिए पहले से ही ये दिन काफी पावन है। आपको पता दें कि पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से इंसान के सारे पापों का नाश होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। आज के दिन गरीबों को दान करने और ब्राह्मणों को भोजन कराने का भी प्रावधान है। आज सुबह से लोग पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं।
गुरु पूर्णिमा की पूजा का शुभ मुहूर्त
गुरु पूर्णिमा का प्रारंभ 2 जुलाई को रात 08 बजकर 21 मिनट से हो चुका है और इसका अंत आज शाम 05 बजकर 08 मिनट को होगा अब चूंकि पूजा पाठ में उदया तिथि ही मान्य होती है इसलिए आज शाम तक कभी भी गुरु पूर्णिमा की पूजा हो सकती है। हालांकि पूर्णिमा की पूजा का समापन चंद्रमा को अर्ध्य देने के बाद होता है इसलिए जो लोग पूर्णिमा का उपवास रखे हैं, वो चांद को अर्ध्य देने के बाद ही पारण करें।
गुरु मंत्र
- गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥
- ॐ वेदाहि गुरु देवाय विद्महे परम गुरुवे धीमहि तन्नौ: गुरु: प्रचोदयात्।
- ॐ त्वमा वह वहै वद वै गुरौर्चन घरै सह प्रियन्हर्शेतु I
- ॐ गुरुभ्यों नम:।
- ॐ धीवराय नम:
- ॐ गुणिने नम:
गुरु स्तुति
- अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम् ।
- तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥
- चिन्मयं व्यापियत्सर्वं त्रैलोक्यं सचराचरम् ।
- तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥












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