Gupt Navratri 2021: गुप्त नवरात्रि के समापन पर नवमी को करें धन दायक प्रयोग
Gupt Navratri 2021: माघ माह की गुप्त नवरात्रि सर्वसिद्धिदायक होती है। गुप्त होने के कारण यह अनेक सिद्ध प्रयोगों और शक्तियों को प्राप्त करने के लिए होती है। माघ माह की गुप्त नवरात्रि का समापन 21 फरवरी रविवार को हो रहा है। इस दिन शुक्र की राशि में मंगल का प्रवेश भी हो रहा है इसलिए यह दिन धनदायक प्रयोग करने के लिए श्रेष्ठ है। यदि आपके जीवन में पैसों का अभाव है, कड़ी मेहनत करने के बाद भी सफलता नहीं मिल रही है और पैसों की लगातार कमी बनी हुई है, कर्ज लेने की नौबत आ रही है तो नवमी के दिन ये कुछ विशेष प्रयोग आप करके धनवान बन सकते हैं।

- कर्ज मुक्ति के लिए : यदि आप पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए बार-बार कर्ज लेना पड़ रहा है तो आप गुप्त नवरात्रि के अंतिम दिन नवमी पर दुर्गासप्तशती के पाठ से हवन करें। हवन समिधा में गाय के शुद्ध घी में डूबे हुए कमलगट्टे का प्रयोग करें। आहुतियां पूर्ण होने के बाद नौ कन्याओं का पूजन कर उन्हें मखाने की खीर खिलाएं। उनसे आशीर्वाद लें। इससे शीघ्र ही कर्जमुक्ति होने लगती है।
- आर्थिक प्रबलता के लिए : धन प्राप्ति के लिए दुर्गा अष्टोत्तरशतनाम को केसर की स्याही से भोजपत्र पर लिखें। पूरा स्तोत्र लिखना संभव ना हो तो इसमें वर्णित दुर्गा के प्रथम 108 नामों को लिखकर और फिर इन्हीं 108 नामों से हवन में आहुतियां देकर इस भोजपत्र को चांदी के ताबीज में बांधकर गले में धारण करने या इसे चांदी की डिबिया में रखकर अपनी तिजोरी में रखें तो अतुलनीय धन संपत्ति का मालिक बना जा सकता है।
- अच्छी नौकरी और व्यापार के लिए :कड़ी मेहनत करने के बाद भी यदि आपको नौकरी में उन्नति नहीं मिल रही है। कारोबार भी गति नहीं पकड़ पा रहा है तो दुर्गासप्तशती के 12वें अध्याय के 21 पाठ नवमी के दिन करें। कन्या पूजन कर उन्हें भोजन करवाएं और यथाशक्ति दान-पुण्य करें। इससे शीघ्र ही आपकी उन्नति में आ रही बाधाएं दूर होंगी।
- सर्वत्र उन्नति के लिए : जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए माघ माह की गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि के दिन सायंकाल के समय गेहूं के आटे में काले तिल मिलाकर उसे पानी से गूंथकर 11 दीपक बनाएं। इन दीपों में सरसों का तेल भरकर दुर्गा मंदिर में प्रज्जवलित करें। दुर्गा मंदिर न हो तो पीपल के पेड़ के नीचे भी इन्हें लगाया जा सकता है। इसके बाद वहीं बैठकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें।












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