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Govatsa Dwadashi 2020 : गोवत्स द्वादशी 12 नवंबर को, जानिए कथा, पूजा-विधि और महत्व

By Pt. Gajendra Sharma
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Govatsa Dwadashi 2020: कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को गोवत्स द्वादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन गाय-बछड़े की पूजा करने से अनेक तीर्थो में स्नान और यज्ञों का पुण्य फल प्राप्त होता है और मृत्यु के पश्चात मोक्ष की प्राप्ति होती है। गोवत्स द्वादशी 12 नवंबर 2020, गुरुवार को हस्त नक्षत्र और विषकुंभ योग में बनाई जाएगी। गोवत्स द्वादशी के दिन गाय-बछड़े की पूजा करके उन्हें गेहूं से बने पदार्थ खिलाए जाते हैं। इस दिन व्रत करने वालों के लिए गाय का दूध और दूध से बने पदार्थ खाना वर्जित रहता है। कटे हुए फलों का सेवन भी नहीं किया जाता है। गोवत्स द्वादशी की पूजा करके कथा सुनने के बाद ब्राह्मणों को फलों का दान दिया जाता है।

गोवत्स द्वादशी 12 नवंबर को, जानिए कथा, पूजा-विधि और महत्व

गोवत्स द्वादशी की कथा

एक समय सुवर्णपुर नगर में देवदानी राजा का राज्य था। राजा की सीता और गीता दो रानियां थीं। राजा ने एक भैंस तथा एक गाय-बछड़ा पाल रखा था। सीता भैंस की देखभाल करती थी तथा गीता गाय-बछड़े की देखभाल करती थी। गीता बछड़े पर पुत्र के समान प्रेम बरसाती थी। एक दिन भैंस ने अपनी रानी सीता से चुगली कर दी किगीता रानी मुझसे ईष्र्या करती है। ऐसा सुनकर सीता ने गाय के बछड़े को मारकर गेहूं के ढेर में छुपा दिया। राजा जब भोजन करने बैठा तो मांस की वर्षा होने लगी। महल के अंदर चारों ओर रक्त और मांस दिखाई देने लगा। भोजन की थाली में मल-मूत्र हो गया। राजा की समझ में कुछ नहीं आया। तभी आकाशवाणी हुई किहे राजन! तुम्हारी रानी सीता ने गाय के बछड़े को मारकर गेहूं के ढेर में छुपा दिया है। कल गोवत्स द्वादशी है। तुम भैंस को राज्य से बाहर करके गोवत्स की पूजा करो। तुम्हारे तप से बछड़ा जिंदा हो जाएगा। राजा ने ऐसा ही किया। जैसे ही राजा ने मन से बछड़े को याद किया वैसे ही बछड़ा गेहूं के ढेर से निकल आया। यह देख राजा प्रसन्न हो गया। उसी समय से राजा ने अपने राज्य में आदेश दिया किसभी लोग गोवत्व द्वादशी का व्रत करें।

कौन करे गोवत्स द्वादशी का व्रत

  • जिन दंपती की संतान न हो, या जिन्हें पुत्र संतान न हो, उन्हें यह व्रत करना चाहिए।
  • जीवन में सुखों और गोधन की प्राप्ति के लिए गोवत्स द्वादशी का व्रत करना चाहिए।
  • यह व्रत करने से गोदान के समान पुण्य मिलता है।
  • इस व्रत को करने से मृत्यु के पश्चात वैतरणी पार कराने स्वयं गोमाता आती है।
  • व्रत के प्रभाव से अनेक यज्ञों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

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English summary
Govatsa Dwadashi is a Hindu cultural andreligious festival which marks the beginning of Diwali celebrations especially in Maharashtra, where it is known as Vasu Baras. here is Puja Vidhi and Importance .
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