Eid-Ul-Fitr 2023: केरल में एक दिन पहले क्यों मनाई जाती है ईद?
रमजान के पाक महीने के बाद ईद के चांद का दीदार करने का इंतजार हर किसी को होता है। जब तक चांद का दीदार ना हो जाए तो जब तक ईद नहीं मनाते। देश में केरल के लोग एक दिन पहले ही ईद मना लेते हैं जानिए क्यों?

मुसलमानों का पाक महीना रमजान बस खत्म होने वाला है। रोजादार और इस्लाम धर्म को मानने वाले रमजान के दौरान हर दिन भूखे प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत में समय गुजारते है। रमजान के 30वें रोज़े के बाद चांद का दीदार होते ही ईद का त्योहार मनाया जाता है। जिस दिन चांद नजर आता है उसके दूसरे दिन ईद उल-फितर (Eid-ul-Fitr)मनाई जाती है। हालांकि दुनिया भर में अलग-अलग दिन ईद मनाई जाती है, लेकिन क्या आपको पता है कि सभी भारतीयों के साथ केरल वाले मुसलमान ईद नहीं मनाते। केरल और उडुपी के लोग भारत में रहने के बावजूद एक दिन पहले ईद मनाते हैं। आइए जानते हैं आखिरी ऐसा क्यों?
जानें कब निकलता है ईद का चांद?
ईद का चांद रमजान के 30वें रोजे़ के बाद नजर आता है। भारत में अरब देशों के ईद मनाए जाने के एक या दो दिन बाद मनाया जाता है। ऐसा अरब देशों की भौगोलिक स्थित के कारण होता है। वहां पर शव्वाल महीने का चांद पहले दिख जाता है। इसलिए वहां भारत से एक या दो दिन पहले ईद मना ली जाती है।
पूरे देश से एक दिन पहले केरल वाले मनाते हैं ईद
भारत का हिस्सा होने के बाजवूद केरल अरब देश में चांद नजर आते ही ईद मना लेते हैं। भारत के अन्य हिस्सों में ईद का चांद नजर आता है तभी ईद मनाई जाती है लेकिन केरल साउदी अरब में जिस दिन ईद का चांद नजर आता है, उसी दिन वो ईद मना लेते हैं। सीधा मतलब है कि केरल के मुसलमान सउदी अरब का अनुसरण करते हैं।
केरल वाले क्यों मनाते हैं एक दिन पहले ईद
कुछ लोगों का दावा है कि रमजान और ईद की तारीख सऊदी अरब के अनुसार तय की जाती है और सऊदी अरब का कैलेंडर फॉलो किया जाता है। हालांकि केरल वाले इस सउदी अरब का अनुसरण करने की बात से इनकार करते हैं।
एक दिन पहले मनाने के पीछे देते हैं ये तर्क
वो ये तर्क देते हैं कि चूंकि केरल पश्चिमी तटीय इलाके में बसा हुआ है जहां चांद लूनर कैलेंडर की 29वीं तारीख को ही दिखाई दे जाता है। कई बार ये तारीख सउदी अरब की ईद की तारीख से मैच कर जाती है तो इसका मतलब बिलकुल ये नहीं है कि हम सउदी अरब का अनुसरण करते हैं।
क्यों मनाई जाती है ईद, क्या है महत्वऔर इतिहास?
ईद-उल-फ़ितर हिजरी कैलंडर (हिजरी संवत) के 10 वें महीने के पहले दिन मनाई जाती है यानी शव्वाल उल-मुकरर्म की पहली तारीख को ईद मनाई जाती है। हिजरी कैलेंडर हिजरी संवत का हिस्सा हैं जिसमे नया चांद देखकर ही शव्वाल देखकर ही शुरू होता है। जब तक चांद नहीं दिखे तब तक रमजान का पाक महीना खत्म नहीं माना जाता है।
हजरत मुहम्मद से जुड़ी है ये मान्यता
रमजान के बाद आने वाला महीना शव्वाल होता है, रमजान के आखिरी दिन चांद नजर आने के बाद अगले दिन ईद मनाई जाती है और नए शव्वाल माह की शुरू होता है। इसी लिए के दीदार के बाद ही भारत समेत दुनिया भर में ईद मनाई जाती है। मान्यता है कि हजरत मुहम्मद मक्का शहर से मदीना के लिए इसी दिन निकले थे।












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