Choti Diwali 2024: जानिए कितने बजे होगी नरक चतुर्दशी की पूजा? क्या है मुहूर्त?
Choti Diwali Puja Muhurat : आज पूरा भारत 'छोटी दिवाली' मना रहा है, इस दिन को 'नरक चतुर्दशी' और 'हनुमान जंयती' के रूप में भी जाना जाता है इसलिए आज के दिन भगवान श्रीकृष्ण की, यम देव और बजरंग बली की पूजा की जाती है।
ऐसा माना जाता है कि आज के ही दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था और लोगों को उसके आतंक से मुक्त किया था।

तो वहीं आज के ही दिन बजरंगबली ने मां अंजनी के गर्भ से जन्म लिया था तो वहीं दूसरी ओर आज के दिन 'यम' के नाम पर दीप जलाने से इंसान नरक में जाने से बच जाता है। कहते हैं कि जो कोई आज 'कान्हा' की अराधना करता है उसे रूप-गुणा का आशीष मिलता है। आज के दिन शुभ मुहूर्त में पूजा करने से इंसान की हर मनोकामना पूरी होती है। आज के दिन दीपदान भी किया जाता है।
नरक चतुर्दशी 2024 शुभ मुहूर्त ( (Chhoti Diwali 2024 Muhurat)
- चौघड़िया मुहू्र्त : 30 अक्टूबर शाम 4:14 PM से 5:37 PM तक।
- अमृत चौघड़िया मुहूर्त: 30 अक्टूबर 8:51 PM से 9: 28 PM तक।
छोटी दिवाली पूजा विधि (Chhoti Diwali 2024 Pujan Vidhi)
- आज तिल के तेल से स्नान करें।
- घर में साफ-सफाई करें।
- भगवान कृष्ण, यम देवता और हनुमानजी की पूजा करें।
- घर के हर कोने में शाम को तेल का दीपक जलाएं।
- घर के बाहर यम देवता के नाम से दीप जलाएं।
- हनुमान जी और भगवान कृष्ण की चालीसा करें।
- प्रसाद चढ़ाएं और लोगों को बांटें।
कृष्ण चालीसा ( Krishna Chalisa)
॥ दोहा॥
- बंशी शोभित कर मधुर,
- नील जलद तन श्याम ।
- अरुण अधर जनु बिम्बफल,
- नयन कमल अभिराम ॥
- पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख,
- पीताम्बर शुभ साज ।
- जय मनमोहन मदन छवि,
- कृष्णचन्द्र महाराज ॥
॥ चौपाई ॥
- जय यदुनन्दन जय जगवन्दन ।
- जय वसुदेव देवकी नन्दन ॥
- जय यशुदा सुत नन्द दुलारे ।
- जय प्रभु भक्तन के दृग तारे ॥
- जय नट-नागर नाग नथैया ।
- कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया ॥
- पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो ।
- आओ दीनन कष्ट निवारो ॥
- वंशी मधुर अधर धरी तेरी ।
- होवे पूर्ण मनोरथ मेरो ॥
- आओ हरि पुनि माखन चाखो ।
- आज लाज भारत की राखो ॥
- गोल कपोल, चिबुक अरुणारे ।
- मृदु मुस्कान मोहिनी डारे ॥
- रंजित राजिव नयन विशाला ।
- मोर मुकुट वैजयंती माला ॥
- कुण्डल श्रवण पीतपट आछे ।
- कटि किंकणी काछन काछे ॥
- नील जलज सुन्दर तनु सोहे ।
- छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे ॥10
- मस्तक तिलक, अलक घुंघराले ।
- आओ कृष्ण बांसुरी वाले ॥
- करि पय पान, पुतनहि तारयो ।
- अका बका कागासुर मारयो ॥
- मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला ।
- भै शीतल, लखितहिं नन्दलाला ॥
- सुरपति जब ब्रज चढ़यो रिसाई ।
- मसूर धार वारि वर्षाई ॥
- लगत-लगत ब्रज चहन बहायो ।
- गोवर्धन नखधारि बचायो ॥
- लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई ।
- मुख महं चौदह भुवन दिखाई ॥
- दुष्ट कंस अति उधम मचायो ।
- कोटि कमल जब फूल मंगायो ॥
- नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें ।
- चरणचिन्ह दै निर्भय किन्हें ॥
- करि गोपिन संग रास विलासा ।
- सबकी पूरण करी अभिलाषा ॥
- केतिक महा असुर संहारयो ।
- कंसहि केस पकड़ि दै मारयो ॥20
- मात-पिता की बन्दि छुड़ाई ।
- उग्रसेन कहं राज दिलाई ॥
- महि से मृतक छहों सुत लायो ।
- मातु देवकी शोक मिटायो ॥
- भौमासुर मुर दैत्य संहारी ।
- लाये षट दश सहसकुमारी ॥
- दै भिन्हीं तृण चीर सहारा ।
- जरासिंधु राक्षस कहं मारा ॥
- असुर बकासुर आदिक मारयो ।
- भक्तन के तब कष्ट निवारियो ॥
- दीन सुदामा के दुःख टारयो ।
- तंदुल तीन मूंठ मुख डारयो ॥
- प्रेम के साग विदुर घर मांगे ।
- दुर्योधन के मेवा त्यागे ॥
- लखि प्रेम की महिमा भारी ।
- ऐसे श्याम दीन हितकारी ॥
- भारत के पारथ रथ हांके ।
- लिए चक्र कर नहिं बल ताके ॥
- निज गीता के ज्ञान सुनाये ।
- भक्तन ह्रदय सुधा वर्षाये ॥30
- मीरा थी ऐसी मतवाली ।
- विष पी गई बजाकर ताली ॥
- राना भेजा सांप पिटारी ।
- शालिग्राम बने बनवारी ॥
- निज माया तुम विधिहिं दिखायो ।
- उर ते संशय सकल मिटायो ॥
- तब शत निन्दा करी तत्काला ।
- जीवन मुक्त भयो शिशुपाला ॥
- जबहिं द्रौपदी टेर लगाई ।
- दीनानाथ लाज अब जाई ॥
- तुरतहिं वसन बने ननन्दलाला ।
- बढ़े चीर भै अरि मुँह काला ॥
- अस नाथ के नाथ कन्हैया ।
- डूबत भंवर बचावत नैया ॥
- सुन्दरदास आस उर धारी ।
- दयादृष्टि कीजै बनवारी ॥
- नाथ सकल मम कुमति निवारो ।
- क्षमहु बेगि अपराध हमारो ॥
- खोलो पट अब दर्शन दीजै ।
- बोलो कृष्ण कन्हैया की जै ॥40
- ॥ दोहा ॥
- यह चालीसा कृष्ण का,
- पाठ करै उर धारि।
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।












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